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अयोध्या में राममन्दिर निर्माण हेतु सनातन धर्म संसद का होगा भव्य आयोजन


अयोध्या के प्रमुख सन्त-धर्माचार्याें ने कार्यक्रम स्थल का किया विधिवत पूजन अर्जन
वासुदेव यादव
अयाेध्या। राम नगरी में 19 सितम्बर को अयाेध्या की प्राचीनतम पीठ तपस्वी छावनी, रामघाट में सनातन धर्म संसद का आयाेजन हाे रहा है। जिसकाे लेकर बुधवार काे संत-धर्माचार्याें ने वैदिक मंत्राेच्चार के साथ कार्यक्रम स्थल का पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर पीठ के महन्त व धर्मसंसद आयाेजक स्वामी परमहंसदास ने कहाकि कार्यक्रम से सम्बंधित लगभग सभी तैयारियां पूूूर्ण कर ली गई हैं। यह धर्म संसद गुरूवार की सुबह ९ बजे से प्रारम्भ हाेकर दाेपहार १२ बजे समाप्त हाेगी। इसमें अयाेध्या के सारे संत-महंत, महामण्डलेश्वर, जगद्गुरू-धर्माचार्य सम्मिलित हाेंगे। वह सब एक मंच पर इकट्ठा हाेकर  हनुमान जी की विशेष आराधना व सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, जिससे राममन्दिर निर्माण में आने वाली बाधाएं दूर हाें। उन्होंने कहाकि एक बार बजरंगबली भूल गए थे कि रामकाज के लिए मेरा अवतार हुआ है। तब जामवंत ने उन्हें याद दिलाया। इतना सुनते ही हनुमान पर्वताकार हाे गए और लंका काे जलाया। उसी तरह से गुरूवार काे हम सब संत-धर्माचार्य सनातन धर्म संसद के माध्यम से हनुमान जी को फिर से जगाने का काम करेंगे। अब राममन्दिर बनने की निर्णायक स्थिति में आ रहा है। इसलिए उसमें आने वाली विघ्न बाधा दूर हाे और ऐसी स्थिति बने, जिससे साैहार्द पूर्ण ढंग से राममन्दिर का निर्माण हाे सके। इसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सब कारसेवा करें। इसके लिए धर्मसंसद के माध्यम से रामनगरी के सभी संत-धर्माचार्य तपस्वी छावनी में इकट्ठा हाे रहे हैं। यह पीठ महात्यागियाें की आचार्य पीठ व पुरानी छावनी है। महन्त ने कहाकि राममन्दिर के लिए अभी तक जितनी भी धर्म सभाएं हुईं। वह सब निश्फल रहीं, लेकिन सनातन धर्म संसद नही हुई थी। जाे कल हाेने जा रही है सनातन धर्म सबसे प्राचीन व वैदिक धर्म है। धर्मसंसद में हजाराें संत-धर्माचार्य एक साथ बैठकर हनुमान जी की आराधना करेंगे, जिससे मन्दिर के बीच में आने वाली बिघ्न-बाधा दूर हाे। श्री दास ने कहाकि श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण शीघ्र हाेना चाहिए। क्योंकि राम के बिना हिन्दुस्तान में सब कुछ अधूरा है। इनके बिना चाहे कितना भी विकास हाे जाए। लेकिन श्रीराम बिना हमारा जीवन अधूरा है। इस माैके पर आचार्य सत्येन्द्र दास वेदान्ती, आचार्य नारायण मिश्र, चन्द्रहास दीक्षित समेत सैंकड़ाें लाेग माैजूद रहे।

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