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मिसाल-बेमिसाल : उत्कृष्ट और मानवतापूर्ण कार्यों के लिए मिसाल बने कांस्टेबल राकेश कन्नौजिया



ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। अमूमन आम आदमी से अमानवीय व्यवहार जैसे तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों से घिरी रहने वाली खाकी का जब कोई जवान समाज में उत्कृष्ट तथा मानवतापूर्ण कार्य करता है तो वह नजीर बनता है और लोग उसकी मिसाल देते हैं। खाकी वर्दी के ऐसे ही एक रणबांकुरे का नाम है राकेश कन्नौजिया, जो आए दिन अपने उत्कृष्ट एवं मानवतापूर्ण कार्यों के लिए समाज, मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियां बटोरता रहता है। 

    कुशीनगर जनपद के खड्डा निवासी 2005 बैच के आरक्षी राकेश कुमार कनौजिया में छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों के प्रति लगाव तथा गरीबों, पीड़ितों और बेसहारा लोगों की मदद करने का जुनून था। वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में आने के बाद भी राकेश की सोच, सिद्धांत और सामाजिक दायित्वों के प्रति उनके लगाव में कोई कमी नहीं आई। वे जहां भी तैनात रहे, अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। वर्ष 2018 में गोण्डा जिले के मोतीगंज थाने की कहोबा पुलिस चौकी पर राकेश की तैनाती हुई, तो यहां भी वह सामाजिक दायित्वों को निभाने से पीछे नहीं हटे।
मध्य रात्रि में बजाज चीनी मिल कुंदरखी पर गन्ना बेचकर वापस घर जाते समय कड़ाके की ठंड और बारिश में भीगने के कारण थरथर कांप रहे किसानों को चौकी पर ले जाकर उन्हें गैस जलाकर आग सिकाने तथा गर्म कपड़े पहनाकर ठंड से बचाने के बाद राकेश कन्नौजिया चर्चा में आए। क्षेत्र के हड़हवा गांव में एक निराश्रित बुजुर्ग व्यक्ति का दाह संस्कार कराने, एक भूखे-प्यासे अर्द्धविक्षिप्त युवक को खाना खिलाने, चमदई नदी के दलदल में फंसी एक गाय को बड़ी मशक्कत के बाद सकुशल बाहर निकलवाने जैसे तमाम मानवतापूर्ण कार्यों के चलते बराबर मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले राकेश कनौजिया के नाम एक और अनुकरणीय कार्य जुड़ गया है। बीती 7/8 सितंबर की रात्रि करीब 12 :15 बजे वह गश्त के लिए निकले। कहोबा-दर्जीकुआं मार्ग पर एक विक्षिप्त व्यक्ति रोड पर बैठा हुआ दिखाई दिया। उससे पूछताछ किया तो वह कुछ भी बोलने व बताने में असमर्थ रहा। इस पर कांस्टेबल राकेश कनौजिया उसे पुलिस चौकी कहोबा पर ले गये तथा नाश्ता पानी कराने के बाद उसको सोने के लिए चारपाई तथा बिस्तर की व्यवस्था करायी और रात में पुलिस चौकी पर ही उसे सुलाया। सुबह नहलाने के बाद उसे अपना कपड़ा पहनाया। इतना ही नहीं, दाढ़ी बनवाकर उसके लुक को ही बदल दिया और नाश्ता वगैरह कराया। कांस्टेबल राकेश के इस कार्य की लोगों द्वारा भूरि भूरि प्रशंसा की जा रही है। अमानवीय कृत्यों तथा आम आदमी से दुर्व्यवहार के लिए बदनाम मित्र पुलिस के बीच राकेश कनौजिया अपने सामाजिक, उत्कृष्ट और मानवतापूर्ण कार्यों के लिए मिसाल बन चुके हैं।
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