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नाले के निर्माण में मानक विहीन सामग्री का हो रहा उपयोग



 ■ पीली ईट और सफेद बालू का 80 फीसद से ज्यादा इस्तेमाल

आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। एक तरफ जहां सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के समुचित विकास के लिए भारी धनराशि भेजी जा रही है। वही विकास कार्य के लिए आए सरकारी धन के बंदरबांट के लिए जिम्मेदारों द्वारा मानक विहीन कार्य कराया जा रहा है। मामला सेंमरियावां विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत छपिया छितौना का है। जहां छपिया में मनरेगा योजना अंतर्गत लगभग 60 मीटर लंबे नाला निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। जिसमें पीली ईट का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों का आरोप है। कि दबंग ग्राम प्रधान द्वारा अधिकारियों को मिलाकर हमेशा सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। कुछ दिनों पूर्व संपन्न हुए ग्राम पंचायत के सोशल ऑडिट में कार्य का भुगतान तो करा लिया गया था। लेकिन कार्य ना होने के कारण उच्चाधिकारियों द्वारा जिम्मेदारों को डांट पड़ी तो उक्त कार्य योजना को पूरा करने के लिए ग्राम प्रधान द्वारा मानक विहीन पीली ईंटों का उपयोग कर दस एक के मसाले से तत्काल चुनाई भी करा दी जा रही है। ऊपर से सीमेंट का लेप लगाया जा रहा है। आखिर यह नाला कितने दिन तक टिकेगा यह एक बड़ा सवाल। वही इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी रजनी सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठ सका जो कि इनके का क्षेत्र अंतर्गत आने वाले अधिकतर ग्राम पंचायतों में भारी अनियमितता का खुलासा पूर्व में हो चुका है। और रिकवरी का भी आदेश उच्चाधिकारियों द्वारा किया गया है। लेकिन उसके बाद भी अपनी जिम्मेदारियों से बेपरवाह बनी हुई है। वहीं जब ग्राम प्रधान से इस बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि चंदा लगाकर इस नाले का निर्माण कराया जा रहा है जोकि मनरेगा योजना के अंतर्गत है। अब सरकार जहां ग्राम पंचायतों में विकास के लिए बड़े पैमाने पर धन खर्च कर रही है तो वहीं ग्राम प्रधान यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं की चंदा लगाकर कार्य कराया जा रहा है  अब एक तरफ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर पलीता लगाया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार को भी बदनाम किया जा रहा है।

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