■ एक फर्जी वरासत का मामला फिर हुआ उजागर
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। मेंहदावल तहसील आजकल फर्जी वरासत होने के मामले के उजागर होने से बेहद ही शर्मसार हो रहा है। वर्तमान और पूर्व के मामले भी अब सामने आ रहे है। जिससे अब लोगो के अपने जमीन के बाबत चिन्तायें बढ़ गई है। जिंदा मुर्दा के इस खेल को राजस्व के कर्मचारियों ने एक तरह से सिस्टम को भी पंगु कर दिया है। एक तरफ जहां तहसील प्रशासन निचली इकाई के जांचोपरांत रिपोर्ट पर भरोसा करती थी वह अब इनके गलत जांच से भरोसा टूट रहा है। जिंदा व्यक्ति के मृत घोषित कर वरासत के अनेको मामलों का उजागर होना यही साबित करता है। ऐसे ही शिवरही ग्राम का मामले में एक लेखपाल और कानूनगों के विरुद्ध मुकदमा भी पंजीकृत किया गया है और लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। ऐसा ही एक ताजा मामला पुनः आया है जिसमे एक महिला को तीन साल पूर्व ही मृत दिखा दिया गया है जबकि महिला अभी जल्द ही इस वर्ष ही मृत्यु हुई है। इसका पता तब चला जब महिला के परिजन वरासत के लिए खतौनी निकलवाया।
बताते चले कि मेंहदावल विकास खंड के ग्राम पंचायत औरही निवासी गिरजेश का उजागर हुआ जिसमें उसकी दादी गुजराती इस साल 4 फरवरी 2019 को हुआ था। जिसके बाद से पोते ने जमीन के वरासत के लिए खतौनी निकाली तो उसमें उसकी दादी गुजराती को लेखपाल ने अगस्त 2016 में मृत दिखाकर किसी गिरधारी पुत्र कुबेर के नाम वरासत कर दिया गया है। जबकि परिवार के किसी सदस्य का नाम गिरधारी पुत्र कुबेर नही है। मामले की जानकारी होते पोते गिरजेश ने तहसीलदार को प्रार्थना पत्र देते हुए परिवार का सेजरा एवं मृतक गुजराती का मृत्यु प्रमाण पत्र दिया गया। अभी भी तहसील प्रशासन ने पीड़ित को न्याय नही दिला पाया है। पूर्व में भी आरोपियों के ऊपर न तो तहसील प्रशासन भी सख्त हो पाया और न ही पुलिस प्रशासन भी सख्त हो पाई है और न ही औरही के मामले में भी तहसील प्रशासन संजीदा हुआ है। जिससे तहसील प्रशासन भी एक तरह से कटघरे में दिखाई पड़ता है।
पूर्व के ग्राम शिवरही के फर्जी वरासत मामले में कब होगी मुकम्मल कार्यवाही
शिवरही ग्राम के फर्जी वरासत के मामले में एक लेखपाल के प्रति लेखपाल संघ के पदाधिकारियों द्वारा तहसील समाधान दिवस के धरना प्रदर्शन भी किया गया था। जो पूरी तरह से अव्याहारिक तरीके से किया गया था। जिस लेखपाल के ऊपर आरोप लगा था। जिससे तहसील प्रशासन भी दबाव में आया और साथ ही अभी तक पुलिस भी गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बाद भी पूरीतरह से अपने कार्यवाही को अंजाम नही दे पाई है। जिससे शासन की मंशा को आघात और भ्रष्टाचार के प्रति वार को खोखला कर रहा है।

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