रिपोर्ट-तरीक़त हुसैन सिद्दीकी
सेमरियावां,संतकबीरनगर। मंगलवार की शाम में विकास खण्ड सेमरियावां क्षेत्र के गांव पुरैना मंसूर में स्थित मदरसा अरबिया नासिरूल उलूम में एक समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान काफी लोगों की हजूम इकठ्ठी रही।
सेमरियावां ब्लाक क्षेत्र के मदरसा अरबिया नासिरूल उलूम पुरैना मंसूर में मंगलवार को एक समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की सरपरस्ती मौलाना अब्दुस्सलाम नदवी और अध्यक्षता मदरसा अरबिया रहमिया दुधारा के प्रधानाचार्य मौलाना माशूक अहमद मोज़ाहिरी ने किया। समारोह की शुरुआत कारी सिद्दीकुर्रहमान कासिमी की तिलावते से हुआ। मदरसा के दो छात्रों मुहम्मद मेराज पुत्र जुनेद अहमद और मुहम्मद जुनेद पुत्र मकसूद आलम ने कारी अज़मतुल्लाह और तमाम उलेमा-ए- कराम के सामने हिफ्ज़े कुरआन को मुकम्मल किया। इस मौके पर मदरसा अरबिया तालीमुल कुरआन सेमरियावां के मोहतमिम मौलाना मुहम्मद मुनीर नदवी ने कहा कि कुरआन करीम की नेमत और बइस्त नबवी के ज़रिये सरजमीने मक्का का सारी दुनिया में परिचय हुआ। हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) का फैज़ सहाबा कराम को पहुंचा तो वह आपके सच्चे जां निसार बन गये। सहाबा ने आपसे बराहे रास्त कुरआन सीखा और सीनों में सुरक्षित किया। उन्होंने कहा कि कुरआन की दौलत दुनिया व आखिरत में कामयाबी की सबूत है बड़े कद्र के लायक हैं वह बच्चे जिन्होंने कुरआन को अपने सीनों में सुरक्षित किया। कारी अमीरूल्लाह नदवी ने कहा कि काबिले तारीफ हैं जिनकी लगातार प्रयासों और मोकम्माल तवज्जो से छात्र अल्पकाल में ही तकमीले हिफ्ज़े कुरआन कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि आज हम जिस कमी का शिकार हैं उसका एक अहम सबब कुरआन से दूरी है। मदरसा अरबिया रहमिया दुधारा के प्रधानाचार्य मौलाना माशूक अहमद मोज़ाहिरी ने कहा कि आज पूरी दुनिया परेशानियों से दोचार है हालात बड़े संगीन और पेचीदा हैं पूरी दुनिया खोफ व हरास के आलम में है। ऐसी सूरतेहाल म़े इंंसान को तहफ्फुज और मदद की ज़रूरत पड़ती है हमें कुरआन मजीद की तिलावत की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए जो कि हमारे लिए किताबे हिदायत है क्यामत तक के लिए रहनुमा और उसूल की हैसियत रखता है। मौलाना अब्दुस्सलाम की दुआइया कलमात पर समारोह सम्पन्न हुआ। इस दौरान हाजी बब्बन, मास्टर नूर मुहम्मद, मौलाना जाफर, अली अहमद, मौलाना मुज़म्मिल हुसेन, अली हुसेन, ज़बीहुल्लाह, हाफिज़ मुहम्मद ज़़ैद आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मदरसा अरबिया तालीमुल कुरआन सेमरियावां के मुहम्मद आसिम नदवी ने किया।

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