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जिम्मेदारो द्वारा मेडिकल कचरा निस्तारण न कर किया जा रहा डंप


आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। कोरोना को लेकर जहाँ पूरे देश मे सतर्कता बरती जा रही है। साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वही जनपद वासियों के लिए बस्ती व गोरखपुर मण्डल अस्पतालों से निकलने वाला कचरा लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। कचरे से उठ रही बदबू और प्रदूषण से स्थानिय लोगों को काफी परेशान होना पड़ रहा हैं। कंपनी के अंदर महीनों से डम्प करके रखा गया कचरा कोरोना के साथ-साथ कई बीमारियों को दावत दे रहा है। जनपद में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालो से निकलने वाले कचरे को नष्ट करने के लिए कानपुर की कम्पनी एमपीसीसी ने सरकार से टेंडर लिया है। कचरे को जलाकर नष्ट करने का काम कंपनी का है, लेकिन यहा मेडिकल कचरे को डम्प कर वातावरण दूषित किया जा रहा है।
    जनपद मुख्यालय खलीलाबाद के इंडस्ट्रियल एरिया में कचरा नष्ट करने का एमपीसीसी कम्पनी का प्लांट। पूर्वांचल के कई जिलों के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे को नष्ट करने के लिए कपंनी ने जिम्मा लिया हुआ है। कचरे को नष्ट करने के लिए इसे जलाया जाना आवश्यक है, लेकिन इस प्लान्ट में कई महीनों से कचरा इकट्ठा करके रखा गया है। महीनों से डम्प करके रखा गया कचरे का यह ढेर लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। कचरे से निकलने वाली बदबू और प्रदूषण से लोग परेशान है। बड़ी मात्रा में इकट्ठा कचरा जलाने के बजाय मिट्टी में दफन कर दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से जहाँ विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। सफाई का अभियान चलाया जा रहा है वही अस्पताल से निकलने वाला कचरा नस्ट नही होने से कई गम्भीर बीमारियों का शबब बना हुआ है। लोगों ने प्रशासन से कंपनी पर कार्यवाई की मांग की है। इस मामले में सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह का कहना है कि असपतालो से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए संस्था को राज्य स्तर से टेंडर मिला हुआ है। मामले की जांच कराकर कार्यवाई की जाएगी।

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