अधिकतर टैंकों से नहीं मिल रहा पानी ।
टैंक बनवाने में करोड़ों खर्च , किया गया घटिया सामग्री का उपयोग ।
आयुष मौर्य
धौरहरा खीरी।क्षेत्र के निवासियों की सबसे बड़ी समस्या शुद्ध जल की है । इस समस्या से यहाँ के निवासियों को निजात दिलाने को अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या फिर किसी भी अधिकारी ने कोई सार्थक प्रयास नहीं किया ।
यहाँ के लोग शुद्ध पानी को भी तरस रहे है जबकि सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके है । क्षेत्र के ग्रामीण आर्सेनिक युक्त पानी पीकर पेट रोग सहित त्वचा समबन्धी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
क्षेत्र का पानी आर्सेनिक युक्त होने के चलते एक दशक पहले पाइप पेयजल योजना के तहत तहसील क्षेत्र में करीब तीन दर्जन ओवर हेड टैंकों का निर्माण करवाया गया था । करोड़ों रुपए खर्च हो जाने के बाद भी लोगों को शुद्ध जल नहीं मिल सका है ।
आलम यह है कि निर्माण में खराब सामग्री का उपयोग किए जाने से ज्यादातर ओवर हेड टैंक कई सालों बाद भी नहीं चल सके हैं । जबकि उसको संचालित करने एवं रखरखाव पर पैसे खर्च किए जा रहे है ।
शिकायतों के बाद भी नहीं मिला पानी , एक दूसरे पर दोषारोपड़ कर रहे अधिकारी ।
विकास क्षेत्र के कलुआपुर गांव मे पाइप पेयजल योजना से बना ओवर हेड टैंक दस साल बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं दे सका है ।
ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद भी जल निगम के अधिकारी विकास विभाग को पत्र लिखकर व विकास विभाग के अधिकारी जल निगम को पत्र लिखकर अपना पल्ला झाड़ रहे है जबकि गांव के 70 प्रतिशत ग्रामीण त्वचा रोग से पीड़ित है ।
ओवर हेड टैंक चलाने वाले सोलर पैनल गायब
समय से पानी मिले इस उद्देश्य से अधिकतर ओवर हेड टैंकों को संचालित करने के लिए बिजली कनेक्शन के साथ ही टैंकों पर लाखों की कीमत के सोलर पैनल लगवाए थे ।
कुछ समय तक तो सोलर पैनल लगे रहे पर समय बीतने के साथ ही एक - एक कर गायब होते गए अब स्थित यह है कि टैंकों के पास सोलर लगाने वाले फ्रेम भी गायब हो गए है ।
सोलर पैनल क्या हुए इस पर कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है । स्थित यह है कि बीडिओ धौरहरा के पास क्षेत्र के ओवर हेड टैंको की जानकारी तक उपलब्ध नहीं है ।
पानी न देने के बाद भी आपरेटर ले रहे पैसे
धौरहरा तहसील क्षेत्र में बने ओवर हेड टैंकों को चलाने के लिए संविदा पर आपरेटरों को रखा गया था ।
इन आपरेटरों को सुरक्षा के साथ ही टैंकों को चलाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी ।पर ये आपरेटर न तो वहाँ रखे सामान की सुरक्षा कर सके और न ही सुचारु रुप से पानी उपलब्ध करवा सके जबकि स्थिति यह है कि ओवर हेड टैंक चलाने के लिए लगाए गए सोलर पैनल गायब हैं ।
2007 में एक गैर सरकारी संस्था और विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने क्षेत्र के पानी की जाँच की तो पाया की क्षेत्रीय लोग जो पानी पी रहे हैं उसमें आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक है ।
स्वास्थ्य सगठन टीम की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने जल निगम को 2008 - 2009 में ओवर हेड टैंको के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी ।
जिसमें कुछ टैंकों का निर्माण कर जल निगम ने उन्हें ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित कर दिया है जबकि कुछ जल निगम के पास संचालित व कुछ निर्माणाधीन है ।बनाए गए ओवर हैण्ड टैंकों की क्षमता गावों की आबादी के अनुसार अलग -अलग है।

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