सुनील गिरि
हापुड़: हमारे देश में जहां शिक्षा का आर्थिक बोझ परिवार पर पड़ता है तो वही मासूम बच्चों को अपनी कमर पर शिक्षा का बहुत सारा भार लेकर विद्यालय जाना पड़ता है।
इसी के मद्देनजर हमारी सरकार ने नई शिक्षा नीति भी बनाई है जिससे बच्चों को किताबों के रूप में अधिक भार ना ढोना पड़े तो वही परिवार पर भी आर्थिक बोझ ना पड़े और देश मे सभी लोग अपने बच्चों को शिक्षित बना सकें इसी के लिए सूर्या फाउंडेशन ने एक पहल करते हुए कक्षा 1 से लेकर कक्षा 5 तक की पुस्तके तैयार की हैं ।
जिनमें एक पुस्तक में सभी विषयों को रखा गया है जिसकी अगर कीमत की बात करें तो 50 से ₹60 में यह पुस्तक मिल सकेगी अगर हमें इन पुस्तकों की बात करें तो इस पुस्तक में हिंदी,अंग्रेजी,संस्कृत, गणित,विज्ञान,सामाजिक विज्ञान,जीवन जीने की कला ऐसे सभी विषय रहेंगे।
जिससे जहां छात्र-छात्राओं पर तो बस्ते का बोझ कम होगा ही साथ में गार्जन पर भी आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा क्योंकि आज के दौर में देखा जा रहा है शिक्षा को लोगों ने व्यवसाय बना लिया है अमूमन देखा जाता है।
कक्षा नर्सरी में एडमिशन होने के बाद छात्र व छात्रा को करीब 15 सौ से लेकर ₹2000 तक की किताबें खरीदने को मजबूर होना पड़ता था लेकिन सूर्या फाउंडेशन की इस पहल से एक बड़ा बदलाव भी होने जा रहा है और साथ ही कक्षा 5 से लेकर 12 तक के बच्चों के लिए भी पुस्तके तैयार करने का काम किया जा रहा है।
जिन्हें जल्द ही उपलब्ध कराने की बात सूर्या फाउंडेशन कर रहा है सूर्या फाउंडेशन ने अपनी इन पुस्तकों को तमाम विद्यालयों में चलाने के लिए अनेकों विद्यालयों से बात भी की है ।
अगर इस तरह की पुस्तके विद्यालय चालू करें तो गरीब व्यक्ति भी अपने बच्चों को शिक्षित बना सकेगा क्योंकि पैसे वाला व्यक्तित्व अपने बच्चे को किसी भी बड़े विद्यालय में शिक्षा दिला सकता है।
लेकिन गरीब व्यक्ति केवल अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में ही पढ़ा पाता है जहां सरकारी विद्यालयों में अभी तक शिक्षा का स्तर सुधरता नहीं दिख रहा है ।
जिस कारण लोगों को प्राइवेट विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना पड़ता है जो कहीं ना कहीं एक गरीब व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है।

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