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तरबगंज: गुरूजी का मोहभंग होरहा है स्कूल से ना आने का समय है ना जाने का समय है




 रमेश कुमार मिश्र

तरबगंज गोण्डा।"देर से आना जल्दी जाना साहब ये ठीक नही है"

फिल्मी गाने के यह बोल तरबगंज शिक्षा क्षेत्र के बनगाँव में खुले प्राथमिक विद्यालय पर सटीक बैठती है । 


हो भी क्यो ना गुरूजी केवल एक घन्टे के लिए स्कूल खोलते है ना आने का समय निर्धारित है और न ही जाने का समय। जिससे बच्चो का भविष्य अधर में लटका हुआ है।और ग्रामीण परेशान है।


बताते चले की तरबगंज शिक्षाक्षेत्र के ग्रामपंचायत बनगाँव के मजरा कंचनपुर में खुला प्राथमिक विद्यालय अपनी किस्मत पर रो रहा है । 


यहाँ तैनात गुरूजी को घर पर काम ज्यादा रहता है । जिससे टाईम से स्कूल पहुँच नही पाते है । अगर स्कूल पहुँच भी गये तो घर जाने की जल्दी रहती है क्योंकि घर में अकेले है पूरा घर देखना पड़ता है। 


टाईम मिल नही पाता है इसलिए गुरूजी बच्चो को छुट्टी देकर जल्दी चले जाते है कारण घर दूर है । लगभग 20किमी दूर फैजाबाद के देवा हास्पिटल के पास इसलिए गुरूजी परेशान है । 


इन्हे पढ़ाई से ज्यादा घर की चिन्ता रहती क्योकि सैलरी भी कम है यही कोई 50से 60हजार के बीच में है इसलिए जल्दी रहती है करे क्या स्कूल में भी बोर होते रहते है।


हाँ साहब ये कोई कहानी नही है ये है हकीकत तरबगंज शिक्षाक्षेत्र के ग्रामपंचायत बनगाँव के मजरा कंचनपुर में खुले प्राथमिक विद्यालय की जहाँ दो अध्यापक तैनात है। 


जिसमे प्राधानाध्यापक आदित्य कुमार श्रीवास्तव,व सहायक अध्यापक आलोक कुमार मिश्र जो फैजाबाद से आते जाते है और कंचनपुर पहुँचने में काफी टाईम लग जाती है इसलिए स्कूल लेट खुलता है और जल्दी बन्द हो जाता है।


सरकार के लाख कोसिस के बाद भी शिक्षा की स्थिति में सुधार होता नही दिख रहा है और बेलगाम अध्यापक सरकार की मनसा पर पानी फेर रहे है और स्कूल बद से बदतर होते जा रहे है ।


जिससे बच्चो का भविष्य अंधकार मय होरहा है और गुरूजी खुलेआम मनमानी पर उतारू है जिसका जीता जागता उदाहरण कंचनपुर का प्राथमिक विद्यालय है ।


जहाँ मीडिया की टीम दिन में 1.20 मिनट पर पहुँची तो देखा गेट में ताला लगा है और स्कूल बन्द है गाँव वालो से पूछने पर पता चला की स्कूल इसी तरह रहता कभी एक घन्टे कभी दो घन्टे के लिए खुलता है ।


बाकी बन्द ही रहता है यही नही खुलता भी है तो गुरूजी गाँव में चले जाते है और आराम करते हुए मोबाइल पर व्यस्त रहते है पढ़ाई नाम की कोई चीज ही नही जिससे गाँव के बच्चे निजी स्कूल में जाने को मजबूर है ।


कारण है कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस स्कूल की तरफ भूल से भी नही देखता है इसलिए मनमानी चल रही है।

क्या कहते है जिम्मेदार.

प्रधानाध्यापक आदित्य कुमार श्रीवास्तव ने बताया की आज हमारी माँ की तबियत खराब हो गयी थी इसलिए 1बजे स्कूल बन्द कर चले गये और रोज टाईम से खोलते है गाँव के लोग झूठ बोल रहे है ।


वही खन्डशिक्षाधिकारी तरबगंज का न. बन्द आ रहा है एसडीएम तरबगंज के मोबाइल पर बेल बजती रही लेकिन उन्होने फोन रिसीव करना मुनासिब नही समझा।

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