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धौरहरा में वर्षों से बंद बोतल में शत्रु संम्पति का जिन्न निकला बाहर,आज भी खतौनी मे हाल पता दर्ज है पाकिस्तान



आयुष मौर्या 

धौरहरा खीरी:देश की आजादी के वर्ष 1947 मे हुऐ भारत/पाक  विभाजन के दौरान देश की बडी और धनी स्टेटो मे शुमार (धौरहरा)कपूरथला स्टेट मे कार्यरत (मुस्लिम समुदाय) से कर्मचारियो द्वारा भारत छोड़ो के दौरान पाकिस्तान चले जाने के कारण भारत सरकार कृषि योग्य व आवासीय संम्पतियो को शत्रु संम्पति घोषित किया गया था। परंतु इन राजघरानों में काम करने वाले लोगों के द्वारा भारत छोड़ने के उपरांत पाकिस्तान से वापस आए कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उपरोक्त भूमि वा आवासीय भूमि पर कब्जा कर लिया तब से आज तक निरंतर बताओ दस्तूर कब्जा जारी है।

प्रावधान के अनुसार दोनो देशो के बटवारे के दौरान इधर से उधर गये लोगो की संम्पति को दोनो देशो की सरकारो ने सरकारी घोषित किया था। इसके लिए भारत सरकार ने भी सन् 2014 मे लोकसभा मे बिल पास कर कैबिनेट की मुहर लगा दी थी जिसमें इस प्रकार की देश भर मे पडी आराजी को शत्रु संम्पति घोषित कर भारत सरकार मे निहित करने का आदेश पारित कर जारी हुआ था। तभी से इस प्रकार की परिसंम्पतियो की निगरानी प्रशाशनिक अधिकारियो के जिम्मे चली गई। बावजूद तहसील धौरहरा मे सैकडो हेक्टेयर शत्रु संम्पति आज भी मौजूद है। जिसका जिन्न उस समय आया जब कस्बा धौरहरा निवासी शिकायतकर्ता सिकंदर खां पुत्र स्वर्गीय असगर अली खां ने दिनांक 12.09.2022 को अध्यक्ष राजस्व परिषद लखनऊ,जिलाधिकारी खीरी,तहसीलदार व चकबंदी अधिकारी धौरहरा को अन्य अभिलेखो के साथ डाक के माध्यम से प्रेषित कर उपरोक्त भूमि दबंगो के कब्जे से मुक्त कराकर सरकार मे निहित कराने का अनुरोध किया।शिकन्दर खां द्वारा की गई शिकायत मे कहा गया है कि तहसील धौरहरा के लेखपाल क्षेत्र अमेठी चकबंदी मे है,जिसकी गाटा संख्या 1495--4.0100/ 1940--2.2500/2055--3.1810 ==कुल आराजी 9.4410 मो0 सद्दीक अहमद पुत्र निहाल नि0 धौरहरा/वारिदहाल पता पाकिस्तान की भूमि दबंगो का कब्जा हटवाकर सरकार मे निहित करने की बात है। इसके अलावा

सिकंदर के द्वारा यह भी बताया गया है कि करीब 35 बीघा भूमि पर उपरोक्त दबंगों ने प्लाटिंग भगवती पुत्र रतनू ,सुंदरलाल ,श्रीपाल व छंगा पुत्र छेदू,बलराम पुत्र कन्हैयालाल ,रामगोपाल पुत्र रामनरेश और संजय व राजू पुत्र बाबूराम निवासी भकुरहिया मु०पो व अमेठी पोस्ट व तहसील धौरहरा के नाम बेच दी गई है जिसकी रकम का बंदरबांट दबंग परिवारी जनों द्वारा कर लिया गया है।

अब देखना यह है तहसील क्षेत्र के जिम्मेदार अरबों रुपए की भू-संपत्ति को भारत सरकार के सुपुर्द करगे या ऐसे ही कागजों की हेराफेरी कर लाखों का गोलमाल करते रहेगे।


क्या कहते है जिम्मेदार

इस महत्वपूर्ण भूमि गबन प्रकरण मे एसीओ चकबंदी मुदस्सिर खांन ने बताया कि उपरोक्त भूमि हमने भी शत्रु संम्पति मे सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर दी है और हमारी जानकारी के अनुसार कस्बा निवासी सिकंदर खान के द्वारा मुकदमा भी बिचाराधीन है। कुछ लोगो द्वारा अवैध रुप से कब्जा करके कृषि कार्य किया जा रहा है बहुत जल्द प्रशाशनिक अमले द्वारा दल-बल के साथ आराजी पर कब्जा होगा। फ़िलहाल कुछ भी हो शिकन्दर खां की शिकायत के बाद क्षेत्र के आमजन में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त है। अब देखना यह होगा कि बोतल से निकला जिन्न किस करवट बैठता है।

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