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राज्यसभा में पहली पंक्ति में प्रमोद तिवारी को सीट आवंटन से बेल्हा ने रचा एक और संसदीय इतिहास



अभय शुक्ला 

लालगंज, प्रतापगढ़। संसदीय इतिहास में मंगलवार को प्रतापगढ़ के नाम एक और बड़ी सियासी उपलब्धि को लेकर बेल्हा मगन हो उठा दिखा। संसद में पहली बार राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे प्रमोद तिवारी नई संसद में विपक्ष की लाबी में प्रथम पंक्ति में आसीन दिखे। राज्यसभा की कार्यवाही का लाइव देख रहे जिले के कांग्रेसियों व समर्थकों में जिले के नाम इस अद्वितीय सम्मान को लेकर प्रसन्नता की लहर दौड़ पड़ी। सदन में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की संस्तुति पर विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी को प्रथम पंक्ति में राज्यसभा के उप सभापति एवं उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने खड़गे के ठीक बगल सीट आवंटन की सदन में व्यवस्था दी। राज्यसभा में दूसरा कार्यकाल विपक्ष के उपनेता के रूप मंे प्रमोद तिवारी के नाम पर संसद के गठन के बाद पहली बार यह संसदीय इतिहास भी मंगलवार को प्रतापगढ़ के नाम दर्ज हो उठा। नई संसद में विशेष सत्र की शुरूआत में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने राष्ट्रीय मुददों पर बहस का भी विपक्ष की ओर से जमकर मुददा भी उठाया। वहीं सोमवार की देर शाम पुरानी संसद में संसद की हुई कार्रवाई की विदाई बेला में प्रतापगढ़ के स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े इतिहास की महत्वता को लेकर भी जिले की आवाज गूंजी। भारतीय संविधान की संरक्षा में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने में पुरानी संसद के दिये गये योगदान पर राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कांग्रेस संसदीय दल की ओर से देर शाम सदन को संबोधित किया। इसके तहत उन्होने देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के योगदान की प्रशंसा करते हुए पं. नेहरू के प्रतापगढ़ जिले में आजादी के आंदोलन में जज्बा भरने वाले रूरे तथा कहला किसान आन्दोलन को लेकर सशक्त नेतृत्व का जोरदार उद्धरण रखा। उन्होने जिले के रामपुर खास के कसिहा रामपुर में 1857 की जंग में अंग्रेजों से युद्ध के शौर्य को गौरवशाली इतिहास बताया।कालाकांकर के स्वतंत्रता आंदोलन के तहत महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के जरिए आजादी के नेतृत्व का भी पुरानी संसद की विदाई बेला में राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने जमकर बखान किया। वहीं राज्यसभा में पुरानी संसद में अपने दूसरे कार्यकाल का भावनात्मक स्मरण करते हुए प्रमोद तिवारी ने राज्यसभा के पुराने भवन से जुड़ी स्मृतियों को भी साझा किया। उन्होनें कहा कि राज्यसभा के पुराने भवन से प्रतापगढ़ की माटी को उनके नाम पर प्रसिद्धि और देश में पहचान मिली। वहीं उन्होनें कहा कि वह सदैव राज्यसभा की इस पुरानी इमारत को हमेशा सम्मान तथा प्यार और सच्ची भावनाओं के साथ प्रेरणाशक्ति के रूप में अपने दिल में बनाये रखेंगे। यह जानकारी मंगलवार को यहां राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी के मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत विज्ञप्ति में दी गई है।

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