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धूमधाम से शिक्षक दिवस के रूप में मनाई गई सर्वपल्ली राधाकृष्ण की जयंती



आनंद गुप्ता 

पलिया कलां खीरी:पलिया कलां कहिए तेज महेन्द्रा  सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर इण्टर कालेज पलिया कलां - खीरी में वन्दना सभा में देश के‌ प्रथम उपराष्ट्रपति व द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई ।  इस अवसर पर विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य सुनीत कुमार मिश्र ने मां सरस्वती के  दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के पश्चात सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए तथा उनके बारे में जानकारी दी। विद्यालय के आचार्य धनुषधारी द्विवेदी ने बताया कि डॉक्टर राधाकृष्णन का तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही किताबें पढ़ने के शौकीन और स्वामी विवेकानन्द से काफी प्रभावित थे। उनका जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण था । उन्होंने संसाधनों के अभाव में भी ऐसा कर दिखाया जो लोगों के लिए प्रेरणा दायक है। उन्होंने देश के सर्वोच्च पद व सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भी प्राप्त किया । एक बार राधाकृष्णन जी के कुछ शिष्यों ने मिलकर उनका जन्मदिन मनाने का सोचा तो इसे लेकर जब वे उनसे अनुमति लेने पहुंचे तो राधाकृष्णन ने कहा कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाने की बजाय अगर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा तो मुझे गर्व होगा। इसके बाद से ही 5 सितम्बर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। पहली बार शिक्षक दिवस 1962 में मनाया गया था।इस अवसर पर विद्यालय के  सभी आचार्य आचार्या एवं सैकड़ों छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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