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स्वतंत्र भारत में रक्तहीन क्रांति के जनक थे पटेल:भाटी



आनंद गुप्ता 

पलियाकलां(खीरी)जिला पंचायत बालिका इंटर कालेज में लौह पुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल की 148वीं जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।इस अवसर पर प्रधानाचार्य कृष्ण अवतार भाटी ने कहा कि सरदार पटेल स्वतंत्र भारत में सफल रक्तहीन क्रांति के जनक थे।उन्होंने बिना किसी रक्तपात के565 रियासतों का विलय भारतीय गणराज्य में किया था।उनकी नेतृत्व कुशलता व साहस के कारण  उन्हें भारत का बिस्मार्क कहा जाता है।भारतीय संस्क्रति व अध्यात्म के प्रतीक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।यदि उन्हें देश का नेतृत्व करने का अवसर मिलता,तो निश्चित रूप से भारत का भूगोल व इतिहास कुछ अलग ही होता।लेकिन व्यक्तिगत निष्ठा राष्ट्रधर्म पर भारी पड़ गई।जिसका मूल्य आज भी देश चुका रहा है।



सामाजिक विज्ञान शिक्षिका शालिनी चौधरी ने कहा कि कुछ लोग शरीर से उपस्थित नहीं रहते हैं, लेकिन उनके विचार सदैव जिंदा रहकर देश व समाज का मार्गदर्शन करते हैं।सरदार पटेल भारत की ऐसी ही महान विभूति हैं।उनकी राष्ट्र के प्रति निष्ठा, समर्पण व कर्तव्य निष्ठा उच्च कोटि की थी।विद्यालय की नोडल अधिकारी आकृति गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल का साहस व दूरदृष्टि कमाल की थी।एक बार किसी मुकदमे की सुनवाई के बीच उनके मुंशी ने एक तार दिया।उन्होंने उसे देखा और जेब में रख लिया।बाद में जज व साथी वकीलों ने तार के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के देहावसान की सुचना थी।लेकिन वे बिना विचलित हुए, मुकदमे में बहस करते रहे।उनकी कर्तव्य निष्ठा की सभी ने प्रशंसा की।



प्रधानाचार्य ने इस अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार को राष्ट्र की आजादी ,एकता व अखंडता को अक्षुण रखने के लिये शपथ दिलवायी।ततपश्चात निबन्ध व भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ सरदार पटेल के चित्र पर वंदन व पुष्पार्चन से हुआ।कार्यक्रम का सफल संचालन विज्ञान शिक्षिका माया वर्मा ने किया।कृतिका वर्मा,रचना मिश्रा, चन्द्रप्रभा सिंह, नीलम कश्यप,अर्चना शुक्ला, अखिलेश वर्मा,अवधेश वाजपेयी की कार्यक्रम में सार्थक उपस्थिति रही।

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