जनपद बलरामपुर के छोटा परेड ग्राउंड में चल रहे विराट 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन गुरुवर को अब थामो पतवार प्रज्ञा संगीत से द्वितीय दिवस के सांध्यकालीन प्रवचन कथा का शुभारंभ हुआ । सियाराम मय सब जग जानी, करहूं प्रणाम जोर जुग पानी, और जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी श्री रामचरित मानस का उदाहरण देकर शांतिकुंज से आए जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि बड़े भाग्य से मनुष्य तन मिला है, इसका सार्थक उपयोग करें ।
हम अपने भाग्य को नहीं बदल सकते पर अपने आचरण और व्यवहार को तो बदलने का प्रयास करें । जो जैसा करता है, सोचता है वैसा ही बन जाता है, अतः सकारात्मक सोच रखें, लोगों को अपना चिंतन बदलना पड़ेगा । इस उदाहरण से प्रवचन कथा के द्वितीय दिवस की सांध्य कालीन कथा में टोली नायक जितेंद्र मिश्रा ने बताया ।
उन्होंने जहां सुमति तहां संपत्ति नाना, जहां कुमति तहां विपत्ति निदाना रामचरित मानस की इन पंक्तियों से मिली शिक्षा को जीवन में उतारने की बात कही । विशिष्ट अतिथियों के क्रम में प्रवचन कथा स्थल पर सदर विधायक पलटू राम का आगमन हुआ । वरिष्ठ ट्रस्टी अशोक गुप्ता, डॉ के के राना व संजय जायसवाल ने उनका स्वागत किया । टोली नायक जितेंद्र मिश्रा ने तिलक चंदन लगाकर और गुरुदेव का साहित्य देकर सम्मानित किया । गायत्री महायज्ञ के तृतीय दिवस के प्रातः कालीन यज्ञ आयोजन में 21 परिजनों ने गुरु दीक्षा ली । चार गर्भवती माताओं मनीषा, पूजा सिंह, बबीता और पूजा तोमर का पुंसवन संस्कार और ग्यारह नौनिहालों ने विद्यारंभ संस्कार की दीक्षा ली । यज्ञ करने वालों में गायत्री परिवार सिद्धार्थनगर के प्रबंध ट्रस्टी दीक्षित, पचपेड़वा के प्रतिष्ठित व्यवसाई दुर्गेश गुप्ता वरिष्ठ ट्रस्टियों के परिजन अवधेश जायसवाल, रीता देवी, राम कृष्ण तिवारी, रोली त्रिपाठी, विवेक, अरविंद, केतकी सिंह सहित नगर व आसपास क्षेत्रों के सैकड़ों परिजन महायज्ञ में शामिल होकर महामंत्र गायत्री, महाकाल सहित विशिष्ट मंत्रों से आहुतियां समर्पित की और लोक मंगल, वातावरण की शुद्धता और राष्ट्र के शक्ति संवर्धन के लिए प्रार्थना की ।
डॉ चिन्मय पंड्या का उद्बोधन आज
राजकीय अतिथि डॉ. चिन्मय पंड्या (प्रति कुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार) का आज प्रातः बलरामपुर जिले में आगमन होगा । डॉ. पंड्या का विशेष उद्बोधन विशेषकर युवाओं के लिए प्रातः 10:00 बजे राष्ट्र यज्ञ स्थल पर होगा ।
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