अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर के उतरौला तहसील क्षेत्र अंतर्गत इटई मैदा में स्थापित बजाज हिंदुस्तान शुगर कंपनी के बजाज समूह की पद्म विभूषण से सम्मानित जानकी देवी बजाज की 133वीं जयंती अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया । शुगर मिल तथा पावर डिविजन के अधिकारियों व कर्मचारियों सहित गणमान्य लोगों जानकी देवी को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया ।
9 जनवरी को दश की स्वतंत्रता, सामाजिक पुनर्जागरण और नैतिक मूल्यों की मजबूत आधारशिला रखने वाली पद्म विभूषण जानकी देवी बजाज की 133वीं जयंती के अवसर पर बजाज समूह की औद्योगिक इकाइयों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। बजाज शुगर फैक्ट्री एवं बजाज एनर्जी पावर प्लांट, उतरौला में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान जानकी देवी बजाज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया गया। वक्ताओं ने उन्हें सादगी, साहस और निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा की जीवंत प्रतिमूर्ति बताते हुए उनके जीवन को भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में बजाज शुगर के इकाई प्रमुख श्याम सिंह, बजाज एनर्जी पावर प्लांट के इकाई प्रमुख समीर सावंत, इंजीनियरिंग हेड डी.पी.एस. यादव, प्रोडक्शन हेड राघवेंद्र श्रीवास्तव, एचआर हेड (पावर) प्रमोद त्रिपाठी, एचआर हेड (शुगर) बृजेश मंडल, लीगल हेड अशोक पांडे एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के.पी. सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कंपनी के संरक्षक शिशिर बजाज ने अपने जारी संदेश में कहा कि जानकी देवी बजाज का जीवन गांधीवादी मूल्यों, अनुशासन और करुणा से ओतप्रोत था। उन्होंने स्वदेशी, खादी और सादे जीवन को अपनाकर स्वयं को नारी सशक्तिकरण, ग्रामीण उत्थान और समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनकी नैतिक दृढ़ता आज भी बजाज समूह के ‘राष्ट्र निर्माण’ के दर्शन को दिशा देती है। 7 जनवरी 1893 को मध्य प्रदेश के जावरा में जन्मीं जानकी देवी बजाज स्वतंत्रता संग्राम से सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं। उन्होंने महिला शिक्षा, सामाजिक समानता, पशु कल्याण और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे भूदान आंदोलन से भी जुड़ी रहीं तथा अखिल भारतीय गौसेवा संघ की अध्यक्ष रहीं। वर्ष 1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी आत्मकथा “मेरी जीवन यात्रा” उनके सादे, अनुशासित और मूल्य-आधारित जीवन का सशक्त दस्तावेज है।
एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ