अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर के अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पायनियर पब्लिक स्कूल एंड कॉलेज में रविवार को महाशिवरात्रि पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।
15 फरवरी को शहर के अग्रेंजी माध्यम विद्यालय पाॅयनियर पब्लिक स्कूल एण्ड काॅलेज में ‘‘महाशिवरात्रि‘‘ का पावन धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम विद्यालय के प्रबन्ध निदेशक डा एमपी तिवारी, उप प्रधानाचार्या उप प्रधानाचार्य शिखा पाण्डेय व राघवेन्द्र त्रिपाठी व कोषाध्यक्ष मीता तिवारी ने भगवान शिव के चित्र पर माल्यार्पण तथा द्वीप प्रज्जवलित करके आरती उतारी। प्रबन्ध निदेशक ने बच्चों को बताया कि महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। माघ फागुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है।
माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथओं के अनुसार इस सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। साल में होने वाली 11 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। साथ ही यह भी बताया कि शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए जैसे-शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते है। सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है। यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है। फल जो दीर्घायु और इच्छाओं की सन्तुष्टि को दर्शाते है। जलती धूप, धन, उपज (अनाज)। दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है। और पान के पत्ते जो सांसरिक सुखो के साथ सन्तोष अंकन करते है। विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय के किड्ज जोन से भगवान शिव जी की बारातियों में सभी गणों एवं देवी-देवताओं के साथ बारात निकाली गयी। विद्यालय के प्रबन्ध निदेशक डा0 एम0पी0 तिवारी एवं सभी अध्यापक अध्यापिकायें तथा छात्र-छात्राएं शामिल हए जिनका स्वागत विद्यालय के आॅडोटोरियम में विद्यालय के प्रबन्ध निदेशक तथा उप प्रधानाचार्या उप प्रधानाचार्य व कोषाध्यक्षा सहित सभी अध्यापक/अध्यापिकाओं ने भगवान शिव जी की बारात का पुष्प वर्षा करके स्वागत किया गया। इस अवसर पर आराध्या मिश्रा (भगवान शिव के रूप में), श्रद्धा तिवारी (पार्वती जी के रूप मे), वेदांस (नंदी महराज जी), अंश सोनकर (श्री ब्रह्मा जी), सांराश (श्री विष्णु जी), श्राविका (माँ लक्ष्मी जी), आयुशी (माँ सरस्वती जी), रूहानिका (राधा जी), अर्जुन (भगवान श्री राम), सिविका (सीता जी), रूद्र प्रताप सिंह (लक्ष्मण), आकर्षित (भरत), श्रेयांस (शत्रुध्न), रिया (रूकमणी), रिया (श्रुतिकृति) प्रिया, त्रिशा, अनन्या, अवन्तिका, श्रद्धा, कोमल, श्रृष्टि, नितिका, आस्था, कृतिका (देवी के रूप में) गणों एव भूत-प्रेतों में प्रथमेश, सूर्यांश, एस0के0 सौर्य, अमन, आदित्य, देव, विराट आदि बारातियों में शामिल हुये। इसी क्रम में सज रहे मेरे भोले बाबा निराले दूल्हे में नामक गीत पर एक समूह नृत्य में अनन्या, अवन्तिका, श्रद्धा, कोमल, श्रृष्टि, नितिका, आस्था, कृतिका, प्रिया, त्रिशा, आदि ने बहुत ही मनमोहक नृत्य प्रस्तुत करके सभी का मन मोह लिया।
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