अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर में शुक्रवार को अकीदत के साथ अलविदा जुम्मा जुमातुल विदा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।
वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ एवं समाज सेवी डॉ अख्तर रसूल खान ने 13 मार्च को बताया कि रमजान के पवित्र महीने का आखिरी शुक्रवार है, जो 2026 में 13 मार्च को अकीदतो मोहब्बत के साथ पुरैनीया तालाब स्थित मुद्दार पेशकर मस्जिद में पढ़ी गई । उन्होंने कहा कि यदि शव्वाल का चांद 20 मार्च को नहीं दिखा, तो यह 20 मार्च को हो सकता है । यह दिन इबादत, कुरान की तिलावत, नमाज और दुआओं के लिए विशेष है, जो रमजान की विदाई और ईद की दस्तक का प्रतीक है।
अलविदा जुम्मा की मुख्य बातें
महत्व :- यह रमजान के अंत का प्रतीक है और इसमें की गई इबादत का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है।
नमाज़ :- अलविदा जुमा की नमाज में 14 रकातें (4 सुन्नत, 2 फर्ज, 4 सुन्नत, 2 सुन्नत, 2 नफ्ल) अदा की जाती हैं।
संदेश :- यह दिन याद दिलाता है कि रमजान के बाद भी इबादत और नेकी का सिलसिला जारी रहना चाहिए।
तैयारियां: इस दिन के बाद ईद की खरीदारी और तैयारियां तेज हो जाती हैं। उन्होंने सभी को अलविदा जुम्मा की मुबारकबाद देते हुए कहा कि अल्लाह हमारी इबादत और दुआएं कबूल फरमाए। इस मौके पर मस्जिद के इमाम हाफिज इरशाद, सदर इरफान, यासिर रसूल खान, अली, वली, अफगान व जमाल सहित सैकड़ों लोगों ने जमात से नमाज अदा किया ।
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