अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर में पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय देवरिया मुबारकपुर के छात्र-छात्राओं ने रविवार को शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद गोंडा के विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक और आधुनिक स्थलों का भ्रमण किया। प्रधानाचार्य अरुण यादव के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से अपनी संस्कृति और विरासत से परिचित कराना था।
15 मार्च को भ्रमण की शुरुआत जयप्रभा ग्राम से हुई, जिसे भारत के पहले आत्मनिर्भर और आधुनिक गांव के रूप में जाना जाता है। भारत रत्न नानाजी देशमुख की संकल्पना से विकसित यह गांव ग्रामीण विकास का एक आदर्श मॉडल है। छात्रों ने यहाँ स्थित जयप्रभा ग्राम पार्क का भ्रमण किया, जो अपनी हरियाली और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। पार्क में छात्रों ने प्रकृति के करीब समय बिताया और जाना कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सकता है। नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित प्रशिक्षण केंद्रों को देखकर छात्र आत्मनिर्भरता के महत्व से भी परिचित हुए। इसके बाद छात्र छात्राओं ने ऐतिहासिक पृथ्वीनाथ मंदिर पहुंचकर पूजन अर्जन किया । उत्तर प्रदेश पर्यटन और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां द्वापर युग का वह शिवलिंग स्थापित है जिसे पांडु पुत्र भीम ने अज्ञातवास के दौरान स्थापित किया था। छात्र-छात्राओं को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि यह शिवलिंग करीब 55 फीट ऊँचा है और इसका एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे समाया हुआ है। इसे एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। यात्रा के अगले चरण में छात्र झालीधाम मंदिर पहुंचे। यहाँ शिक्षिका सविता पांडेय और शुभेक्षा श्रीवास्तव ने बच्चों को प्राचीन सरोवर और मंदिर के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया। छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सरोवर के किनारे बैठकर मछलियों को चारा खिलाया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से जलीय जीवों और विभिन्न प्रकार की मछलियों के बारे में जानकारी ली, जिससे उनका विज्ञान विषय के प्रति रुझान भी बढ़ा। छात्र-छात्राओं ने चारों धाम मंदिर के भी दर्शन किए और यहां की वास्तुकला के सराहना की। पूरे भ्रमण के दौरान छात्र छात्रा काफी उत्साहित दिखे और उन्होंने डायरी में महत्वपूर्ण जानकारियां नोट कीं। प्रधानाचार्य अरुण यादव ने बताया कि ऐसे शैक्षिक भ्रमण से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है और उनमें सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना जागृत होती है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से छात्र छात्राओं में न केवल अपनी धरोहरों के प्रति सम्मान बढ़ता है, बल्कि उनमें व्यावहारिक ज्ञान का भी विकास होता है। पूरे भ्रमण के दौरान छात्र डायरी और पेन के साथ महत्वपूर्ण जानकारियां नोट करते दिखे। इस दौरान विद्यालय का समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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