अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर में सोमवार को खाद बीज एवं कीटनाशक विक्रेता संगठन कृषि उत्पादन विक्रेता संघ के आवाहन पर जिले भर के खाद बीज एवं कीटनाशक दुकाने बंद रहीं ।
27 अप्रैल को कृषि उत्पादन विक्रेता संघ के जिला अध्यक्ष महेश मिश्रा की अगुवाई में जिले भर के खाद बीज एवं कीटनाशक दवा व्यवसाईयों ने अपनी दुकानों को बंद रखकर विरोध दर्ज कराया । जिला अध्यक्ष महेश मिश्रा ने बताया कि Agro Input Dealers Association (AIDA), नई दिल्ली देश के खाद,बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं का एक रजिस्टर्ड संगठन है जो लगभग 5 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है । संगठन के सदस्यों द्वारा पिछले 10 सालों से लगातार समस्याओं का सामना किया जा रहा है और केंद्र एवं राज्य सरकारों के सम्बंधित अधिकारियों तक बार-बार निवेदन किए जाने के बाद भी इनका निराकरण नहीं होने के कारण 27 अप्रैल 2026 को पूरे देश के कृषि आदान व्यापारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल रहे । प्रधानमंत्री को दिए पत्र में मांग किया गया है कि उर्वरक निर्माता कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों की 'जबरन लिंकिंग' को अपराध घोषित किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय की तर्ज पर पूरे देश में अनुदानित उर्वरक के साथ गैर-अनुदानित उत्पाद बेचने की बाध्यता पर रोक लगे। खाद की डिलीवरी डीलर के बिक्री केंद्र (Point of Sale) तक कंपनियों द्वारा सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में यूरिया जैसे खाद की डिलीवरी रेल-हेड पर दी जा रही है, जिससे डीलरों को प्रति बैग 40 से 50 रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है । बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8% किया जाए । ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए इस पोर्टल को वैकल्पिक बनाया जाए और इसकी अनिवार्यता केवल निर्माताओं एवं थोक विक्रेताओं तक सीमित रखी जाए। अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगे या अधिकृत डीलरों को विनियमित (Regulated) बिक्री की अनुमति दी जाए। खाद, बीज एवं कीटनाशक के सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने पर विक्रेता को अपराधी नहीं, बल्कि केवल गवाह माना जाए। चूंकि विक्रेता जिला कृषि अधिकारी से प्राप्त लाइसेंस के आधार पर केवल सीलबंद माल बेचता है, अतः गुणवत्ता की पूर्ण जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए। कंपनियों के लिए पुराने या एक्सपायर्ड स्टॉक को वापस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए। नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को 'प्रथम पक्ष' (First Party) बनाने के कठोर प्रावधान को शिथिल किया जाए। किसानों द्वारा झूठी शिकायतें करते हुए व्यापारियों को ब्लैकमेल किया जाता है । ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करने के पहले जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई जावे उसके अनुशंसा के बाद ही कार्रवाई की जावे। छोटी-मोटी बातों पर उप संचालक कृषि द्वारा लाइसेंस निलंबित किए जाने पर 21 दिन में स्वतः बहाली का प्रावधान किया जावे । खाद एवं बीज के लाइसेंस की अवधि 5 वर्ष एवं कीटनाशक के लाइसेंस आजीवन है ऐसी स्थिति में हर साल कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता को समाप्त किया जावे, तथा कई राज्यों में अनाज और उद्यानिकी के बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की प्रक्रिया है जबकि बीज अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है इस प्रथा को समाप्त किया जावे । संगठन द्वारा प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि व्यापारियों की समस्याओं के उचित निराकरण के लिए उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय के साथ-साथ केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित करें कि वह आगामी एक माह में इन समस्याओं के उचित निराकरण हेतु ठोस कदम उठावें । पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि समस्याओं का समाधान एक माह में नहीं किया गया तो आगामी खरीफ सीजन के पूर्व मजबूरी में अनिश्चितकालीन बंदी किया जाएगा जिससे देश के कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव होने के साथ-साथ किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जवाबदारी राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों की होगी। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष महेश मिश्रा के साथ हरि ओम महेश्वरी, अनुराग मोदी, अशोक माहेश्वरी, चंद्रभूषण शुक्ला, पवन कुमार बंसल, सहजानंद मिश्रा, अमन बंसल, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, राजेंद्र सिंह, वारिस अली शहजाद, मुबाशिर, चंद्र भवन तिवारी, राजेंद्र माहेश्वरी, फिदा वारसी, रवि मिश्रा, युधिष्ठिर मौर्या तथा संजय गुप्ता सहित अन्य कई व्यापारी मौजूद थे।
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