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पटरियों पर सरपट दौड़ने को तरस रही भारतीय रेल,हादसों से सबक नही ले रहे आलाधिकारी

रिपोर्ट:- अशफ़ाक खान


रेलवे का बेहद बुरा हाल: महज 10 घंटे में पलटने से बचीं तीन ट्रेनें, तस्वीरों में देखें



केस 1: उन्नाव के मगरवारा में बीते शुक्रवार रात करीब सवा दस बजे टूटी हुई पटरी से बिहार संपर्कक्रांति एक्सप्रेस गुजर गई। जब लोको पायलट को झटके लगे तो टूटी पटरी की जानकारी रेलवे अधिकारियों को दी। आनन-फानन में पटरियों को ठीक करवाया गया, जिसके बाद ट्रेनों का संचालन दुरुस्त हुआ। इससे तीन घंटे तक ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा।



केस 2: शनिवार सुबह करीब छह बजे सफेदाबाद से बाराबंकी जा रही अम्रपाली एक्सप्रेस हादसे का शिकार होते होते बच गई। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोका और जानकारी रेलवे अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि करीब 6 इंच पटरी का टुकड़ा गायब मिला। लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाए। इससे करीब 80 मिनट ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा।


केस 3: लखनऊ जंक्शन से रवाना हुई 12533 पुष्पक एक्सप्रेस बीते शुक्रवार रात मानकनगर में टूटी हुई पटरी से गुजर गई। करीब रात नौ बजे ड्राइवर को भनक लगी तो सूचना कंट्रोल रूम को दे दी। भले ही हादसा टल गया हो, लेकिन यात्रियों की जान सांसत में फंस गई थी। पटरी को जॉगर प्लेट से जोड़ा गया।
यह हाल है उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के रेलवे ट्रैक का। महज दस घंटे के भीतर तीन लग्जरी ट्रेनें पुष्पक एक्सप्रेस, आम्रपाली और बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस टूटी पटरियों से गुजरीं। भले ही हादसे टल गए हों, लेकिन रेलवे अधिकारियों की लापरवाही से हजारों यात्रियों की जान खतरे में जरूर पड़ गई थी। बदइंतजामी की स्थिति यह है कि रेल फ्रैक्चर बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं और आला रेलवे अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। स्थिति यह है कि पटरियों की नियमित जांच से लेकर मुख्य जगहों पर गश्ती तक का संकट बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कैफियत एक्सप्रेस व उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने की घटनाओं के बाद रेलवे की जमकर फजीहत हुई। सुरक्षित रेलवे सफर को लेकर अंगुलियां उठीं और यात्रियों में खौफ व्याप्त हो गया। जर्जर रेलवे ट्रैकों से लेकर एसी दफ्तरों में आराम फरमाने वाले रेलवे अधिकारियों तक पर सवाल उठाए गए, लेकिन नतीजा जस का तस रहा। रेल फ्रैक्चर की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है।
बता दें कि उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की कानपुर रेलखंड, बाराबंकी रेलखंड, सुलतानपुर रेलखंड पर ट्रेनों का सफर खतरे से भरा है। बीते शुक्रवार रात मानकनगर में टूटी पटरी से पुष्पक एक्सप्रेस गुजरने की सूचना पर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। पटरी को जैसे-तैसे जॉगर प्लेट से जोड़कर संचालन शुरू कराया गया। वहीं महज दो घंटे बाद उन्नाव के मगरवारा में पटरी टूटी होने और उससे बिहार सम्पर्कक्रांति के गुजरने की खबर से हड़कंप मच गया।


मेंटेनेंस की कमी से बिगड़ रहे हालात

लखनऊ-मंडल के रेलखंडों की पटरियों की दशा किसी से छिपी नहीं है। अव्वल पटरियां जर्जर हैं, उस पर ट्रेनों का दबाव और मेंटेनेंस का अभाव भी है। पटरियाें की मेंटेनेंस व नियमित जांच कहीं मंडल के लिए नासूर न बन जाए। जर्जर पटरियों से ट्रेन चलाना खतरे से खाली नहीं है। यह खुद रेलवे अधिकारी मानते हैं।

गैंगमैन तो घरों पर बजा रहे ड्यूटी

बता दें कि अकेले उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में आठ सौ से अधिक गैंगमैन आला रेलवे अधिकारियों के घरों व दफ्तरों में ड्यूटी बजा रहे हैं, जबकि उनका मूल काम पटरियों का मेंटेनेंस का है। ऐसा तब है जब हाल ही में हुए हादसों के बाद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने सेफ्टी से जुड़े कर्मचारियों को ड्यूटी के लिए ताकीद किया था।

प्रमुख अभियंता निरीक्षण पर पहुंचे

उत्तर रेलवे के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर आरके अग्रवाल शनिवार को निलांचल एक्सप्रेस से उन्नाव में निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने लखनऊ से कानपुर के बीच विंडो ट्रेलिंग भी की। उन्होंने बताया कि पटरियों के बाबत अधिकारियों से बातचीत की और गंगापुल का भी निरीक्षण किया। इसके बाद वह हजरतगंज स्थिति डीआरएम कार्यालय भी आए, जहां अधिकारियों संग मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
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