गढ़ को बचाने में ताख पर रखनी होगी पार्टीगत भावना
गुजरात:गुजरात विधान सभा चुनाव की रणभेरी कभी भी बज सकती है और इसके लिए सत्ता सीन बीजेपी ने सत्ता में वापसी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है ! कभी गुजरात में नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व के बलबूते सत्ता पर लगातार आसीन होती रही बीजेपी इस बार मतदाताओं की चौखट पर पसीने बहाने को मजबूर हो रही है !
नोट बंदी और जीएसटी के बाद जनमानस में फैले आक्रोश को भी राज्य मृतपाय पड़ी कांग्रेस भी भुनाने में नाकामयाब हो रही है ! कांग्रेस के युवराज लगातार दौरे पे दौरा कर रहे है लेकिन जनता उन्हें गंभीरता से नहीं ले रही है !
कांग्रेस के लिए एक बहुत अच्छा मौका था कि अवाम में उमड़े आक्रोश को वह हवा देकर सत्ता तक पहुंचने में कामयाब हो सकती थी , लेकिन वह जमीनी स्तर पर इतना कमजोर हो चुकी है कि उसे गुजरात जैसे राज्य में संगठन को आधुनिक तौर तरीको से खड़ा करना पड़ेगा !और यही नहीं दस जनपथ की गणेश परिक्रमा करने वाले नेताओ से सावधान रहकर जमीनी स्तर पर जुड़े लोगो को तरजीह देनी होगी ,अन्यथा गुजरात में कांग्रेस इतिहास के पन्नो में दफन होकर रह जाएगी !
बीजेपी के लिए गुजरात फ़तेह करना कोई मुश्किल तो नहीं है लेकिन आसान भी नहीं है ! इस बार मोदी जैसा कद्दावर मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी के पास नहीं है जिसको आगे करके वोट बटोरा जा सके , कमजोर विपक्ष का फायदा उसे जरूर मिल सकता है !
पाटीदारो के स्वयंभू नायक हार्दिक पटेल भले ही बीजेपी को हराने की बात करते हो लेकिन सच तो यह है की राज्य में उनका कोई वास्तविक जनाधार नहीं है जो किसी भी दल को जिता या हरा सके !उनकी नाक के नीचे उनके ही संगठन से जुड़े तमाम नेता बीजेपी का दामन थाम चुके है !
समाज सेवियो,और महिलाओ को जोड़ने से बन सकती है बात
इस बार बीजेपी को टिकट बटवारे में पार्टीगत भावना को ताख पर रखकर कुछ समाजसेवी ख्यातिप्राप्त महिलाओ और प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े लोगो को आगे करना होगा अन्यथा राज्य का कमजोर नेतृव्त्व बीजेपी की प्रयोगशाला का पूरी तरह से बंटाधार कर देगा !
राजनैतिक विश्लेषक और गुजरात मामलों के जानकर निमेष भाई शाह और किरणभाई दयातर कहते है कि पार्टी को हर जिले से कम से कम एक सीट प्रबुद्ध वर्ग और महिलाओ जरूर देना चाहिए जो अपने बलबूते समाज के उत्थान में प्रमुख भूमिका निभा कर रोजगार का सृजन कर रहे है !
संतोष तिवारी
जर्नलिस्ट बड़ौदा गुजरात


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