अखिलेश्वर तिवारी/आदेश तिवारी
बलरामपुर । मानवीय एवं नैतिक मूल्यो की रक्षा करने में असफल योगी सरकार की पुलिस ने निहत्थे आंगनबाडी कार्यकत्री एवं सहायिकाओं पर लाठी भाजकर आलोक तांत्रिक व अमर्यादित कृत्य किया है| उक्त बाते भारतीय मानवा अधिकार एसोसिएसन के जिला महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति के सदस्य सुशील श्रीवास्तव ने एक विचार गोष्ठी में कही । उन्होनें कहा कि प्रदेश में जंगल राज कायम है, प्रदेश सरकार पूरी तरह फेल है । मुख्यमंत्री अयोध्या में दीपदान और चित्रकूट में कामता नाथ भगवान का दर्शन करके हिंदू मतदाताओं को रिझाने में लगे है जबकि हकीकत से कोसो दूर है । जमीनी हकीकत यह है कि बिना सुबिधा शुल्क और जुगाड के किसी विभाग में निरीह व बेसहारा लोगों का काम नही हो रहा है । कानून व्यवस्था पंगु हो चुकी है तमाम विभागों का काम आंगनबाडी कार्यकर्ताओं से लिया जाता है । बदले में उनको मनरेगा मजदूरों के बराबर भी मजदूरी नही दी जाती है । इतने कम पैसे में उनके परिवार की जीविका कैसे चल सकें इसकी सुधि प्रदेश सरकार ने न लेकर उल्टे उन्हें शांति पूर्वक अपनी बात कहने और धरना देने से रोका जा रहा है । न मानने पर पुलिस निरीह और निहत्थे महिलाओं पर लखनऊ में लाठी भाजकर ब्रिटिश इतिहास को दोहराने का काम योगी सरकार ने किया है । इससे प्रदेश की न्याय व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गया है ।सामाजिक कार्यकर्ता सहाबुद्दीन खां ने कहा कि उत्तर प्रदेश को छोडकर बाकी प्रदेशों की सरकारों ने आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को संतोष एवं सम्मान जनक वेतन क्रमश: दस हजार, अठारह हजार रूपया प्रतिमाह देने का काम कर रही है । गोष्ठी में संकटा प्रसाद, चिनमुन कनौजिया, संतोष श्रीवास्तव, सालिक राम, अकमल खां बुद्धू, गिरजेश मिश्रा, राजेश श्रीवास्तव सहित दर्जनों लोगो ने अपने विचार व्यक्त करते हुए आंगनबाडी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज की निंदा की है|


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