राकेश गिरी
बस्ती। जीवन में स्वास्थ्य ही असली धन है। धनतेरस का पर्व हमें प्रकृति के साथ तादात्मय और निरोगी रहने का स्मरण कराता है। धन्वन्तरि मान्य देवताओं में से एक हैं। भगवान धन्वन्तरि आयुर्वेद जगत् के प्रणेता तथा वैद्यक शास्त्र के देवता माने जाते हैं। भारतीय पौराणिक दृष्टि से ‘धनतेरस’ को स्वास्थ्य के देवता धन्वन्तरि का दिवस माना जाता है। धन्वन्तरि आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देवता हैं। धनतेरस के दिन उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे समस्त जगत् को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायु प्रदान करें। यह विचार अपर जिलाधिकारी भगवान शरण पटेल ने व्यक्त किया। वे मंगलवार को धनतेरस पर्व पर पटेल एस.एम.एच. हास्पिटल एण्ड आयुष पैरा मेडिकल कालेज गोटवा में आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
विशिष्ट अतिथि मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जे.एल.एम. कुशवाहा ने कहा कि आयुर्वेद विस्तार के प्रति सरकार गंभीर है। निश्चित रूप से धन्वन्तरि की परम्परा को विस्तार देते हुये यहां से निकले छात्र पीड़ित मानवता की निष्ठा से सेवा करेंगे।
कार्यक्रम को डा. राकेश मणि त्रिपाठी, वी.वी. मिश्र, डा. आलोक रंजन, प्रेमचन्द्र चौधरी, वीरेन्द्र चौधरी आदि ने सम्बोधित करते हुये धन्वन्तरि दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रबंधक डा. वी.के. वर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि आयुर्वेद, होम्योपैथी आदि पद्धतियां रोगियों के लिये बरदान है। डा. वर्मा ने एडीएम और सीएमओ, डा. राकेश मणि को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
दूसरे चरण में डा. रामकृष्ण लाल जगमग के संचालन में आयाजित कवि सम्मेलन में सत्येन्द्रनाथ मतवाला, लालमणि प्रसाद, पंकज सोनी आदि ने काव्य पाठ किया। बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे ।


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