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गोण्डा:स्वतन्त्रता आन्दोलन के नायक राम अशीष मिश्र नही रहे


पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी भी करते थे सम्मान
गार्ड आफ आनर के साथ आज होगा अन्तिम संस्कार
गोण्डा। स्वतन्त्रता आन्दोलन के नायक वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम अशीष मिश्र का सोमवार को हृदय गति रुकने के कारण उन्होंने अन्तिम सांस ली।
रुपईडीह विकास खण्ड के ग्राम पंचायत बिछुड़ी निवासी राम अशीष मिश्र का स्वतन्त्रता आन्दोलन में देवीपाटन मण्डल में अद्भुत पूर्ण योगदान देने वाले वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम अशीष मिश्र का निधन हो गया।
106 वर्षीये आजादी आन्दोलन के इस महान नायक ने अपनी अंतिम सांस अपने पैतृक गांव बिछुड़ी में ली। स्वतंत्रता आन्दोलन में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले मिश्र के निधन से पूरे जिले में शोक की लहर छा गई। उम्र के अंतिम पड़ाव में भी श्री मिश्र अब तक सामाजिक क्षेत्र में अपना योगदान देते रहें। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी उनका बेहद सम्मान करते थे। मिश्र अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम अशीष मिश्र जी का जन्म अगस्त 1912 में थाना कौड़िया के गांव बिछुड़ी में हुआ था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा कौड़िया में सन् 1932 में तथा हाईस्कूल की शिक्षा बहराइच जिले के पयागपुर से ली। 1937 से राजनीति में उतरे श्री मिश्र ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा और न कभी चुनाव लड़े। उन्हें कभी किसी पद की लालसा नही थी। फिर भी सामाजिक कार्यों में गरीबों की आवाज बुलंद करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहता था। अपने जीवन काल में वे भारत छोड़ो आन्दोलन के तहत 1941में बहराइच जेल गये। जिसमें उन्हें 9 माह की सजा व पचीस रुपये जुर्माना न देने पर दो माह अतिरिक्त सजा काटनी पड़ी थी। 1942 में गोण्डा बहराइच रेलमार्ग पर बनगाई और विश्वेस्वरगंज के बीच राउतारा गांव के पास उन्होंने टेªन रोक दी जिस पर ब्रिटिश शासन द्वारा उन्हें गोली मारने का आदेश हुआ। जिस पर श्री मिश्र कुछ दिनों के लिए गोपनीय स्थान पर चले गये। इसके बाद बहराइच में मीटिंग करते वक्त उन्हें हिरासत में ले लिया गया। जहाँ पर तीन माह तक जेल में रहे। इस दौरान उन्हें दो साल की सजा तथा पचास रुपये जुर्माना हुआ। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई। सामाजिक कार्यों में वे हमेशा सहभागिता करते रहे। गरीबों की आवाज बुलंद करना व निर्धन कन्यायों की शादी के लिए वे हमेशा अगवाई करते थे।
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