राकेश गिरी
बस्ती । भारतीय संविधान विश्व का अनूठा संविधान है जिसमें कर्तव्य, अधिकार के साथ ही दण्ड के भी समुचित प्राविधान किये गये हैं। हमारा संविधान समय की शिला पर निरन्तर खरा उतरा है। यह विचार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मोहनलाल ने व्यक्त किया। वे संविधान दिवस पर रविवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं चाइल्ड लाइन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित विधिक साक्षरता शिविर को सम्बोधित कर रहे थे।
भारतीय संविधान की आवश्यकता क्यों पड़ी, उसकी खूबियों, निर्माण प्रक्रिया आदि की विस्तार से जानकारी देेते हुये प्राधिकरण के सचिव मोहनलाल ने कहा कि भारत का संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
नव चयनित सिविल जज प्रोफेसर यशपाल वर्मा ने कहा कि भारत का संविधान जिस समय बनाया गया, उसे समय की तत्कालीन परिस्थितियों तक सीमित नही रखना चाहिए, क्योंकि संविधान निर्माण में ऐतिहासिक मूल्य और दर्शन ने भी महत्त्वपूर्ण प्रभाव डाला है। भारतीय संविधान सर्वोच्च रुप से विभिन्न विचारधाराओं और संवैधानिक नियमों और मूल्यों को स्थापित करता हैं । भारतीय राज्य की तस्वीर स्पष्ट रूप से संविधान की प्रस्तावना में दी गयी है कि भारत संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणतांत्रिक राज्य है। इसकी स्पष्ट पहचान हमें इस बात से मिलती है कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग...से शुरू होती है अर्थात् सरकार की सभी प्रकार की शक्तियों का स्रोत भारत के लोग है। इस प्रकार उद्देशिका में जनता की भावनाएँ और आकांक्षाएँ हैं जो संक्षेप में, स्पष्ट रूप से उद्देशिका में समाविष्ट है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल किशोर श्रीवास्तव ने संविधान दिवस पर आयोजित शिविर मंे कहा कि भारतीय संविधान की महत्त्वपूर्ण कुंजी है प्रस्तावना।” इसमें भारतीय संविधान का दर्शन छिपा है जो भारतीय लोगों को सदैव संविधान के आदर्श मूल्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरणा देता रहेगा। हमारा संविधान हमें अधिकार देने के साथ ही कर्तव्य का भी बोध कराता है जिसका पालन प्रत्येक भारतीय नागरिक को करना चाहिये।
चाइल्ड लाइन के निदेशक पंकज ने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि भारतीय संविधान स्वयं में अनूठा होने के साथ ही समयगत संकटों से देश को उबारने में सक्षम है।
कार्यक्रम में अम्बुज कुमार यादव, तमन्ना, अशरफ, उमंग, शानू गुप्ता, संगीता, विकास चौधरी, प्रिन्सी पाल, प्रतिभा सिंह, संदीप सिंह, विजय वर्मा, सुनील कुमार, जूली शर्मा के साथ ही अनेक लोग उपस्थित रहे।


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