अमरजीत सिंह
भारी मशीनों की गड़गड़ाहट और ट्रकों के आवागम चीर रहा है रात का सन्नाटा,रात को ठीक से सोने नही पाते है ग्रामीण
उत्तर प्रदेश में फ़ैज़ाबाद जिले के सोहावल व रुदौली तहसील में चल रहे बालू घाटों पर अवैध खनन की शिकायत के बावजूद प्रसाशन व खनन विभाग के अधिकारी क्यों चुप्पी साधे है और अवैध रूप से चल रहे बालू घाटों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नही हो रही है क्या जम्मेदार अधिकारी जानबूझ कर मौन है सोहावल तहसील के एक घाट दोस्तपुर रग्घू का लाइसेंस निरस्त कर जिला प्रशासन और खनन विभाग अपनी कार्रवाई को लेकर भले ही संतुष्ट हो लेकिन सोहावल व रुदौली में रात-दिन अवैध रूप से खनन की शिकायतें डीएम से लेकर एसडीएम व खनन विभाग के अधिकरियों से की गई लेकिन इन शिकायतों को लेकर भी इससे जुड़े जिम्मेदार अधिकारी क्यों चुप है अब जनता के जेहन में प्रशासन की शिथिलता को लेकर सवाल उठने लगे है क्या कहीं बालू घाट संचालकों और खनन से जुड़े जिम्मेदार अधिकरियों से मिली भगत और बंदर बांट का खेल तो नही है बीते सोमवार को बड़ागांव रेलवे स्टेशन के रेलवे फाटक को पार कर रही ओवर लोड दो ट्रकों का एक्सल टूट गया एक तो किसी तरह निकल गई लेकिन दूसरा रेलवे ट्रैक पर ही फंस गया जिसकी वजह से घण्टो तक कई रेलगाड़ियों का आवागमन प्रभावित रहा यही नही खनन नियमावली में निर्देश है कि शाम सूरज ढलने के बाद खनन न हो फिर भी रात में अवैध खनन होता है और वह भी पुकलैंड जैसी भारी मशीनों से मशीनों की गड़गड़ाहट की आवाज से घाटों के आस-पास निवास करने वाले गांव के लोग ठीक से सो नही पा रहे है बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में जुटे छात्रों की पढ़ाई ट्रक के सायरनों और इंजन की आवाज से प्रभावित हो रही है। इन छात्रों को ध्वनि प्रदूषण प्रभावित कर रहा है इस तरह से मुख्यमंत्री योगी जी की मंशा भी प्रभावित हो रही है रॉयल्टी के नाम पर लूट तो इस कदर है कि आम आदमी तक मोरंग ही नही बालू तक सस्ते मूल्य में नही पहुंच रही है ट्रालियों से बालू लादकर व्यापार करने वालों सहित किसानों को अपने मकान बनवाने तक मे रॉयल्टी के नाम से इस कदर लूटा जा रहा है कि पिछले सत्र में जहां 1600 रुपये तक बालू आम आदमी के घर तक गिराई जाती थी वहीं अब करीब 4 हजार रुपये तक एक ट्राली बालू गिर रही है जबकि पिछले सत्रों में 4 हजार रुपये में ट्राली भर मोरंग गिरती थी
जबकि इस बार 10 हजार रुपए में एक ट्रक बालू ठेकेदारों द्वारा बेची गई इतनी मंहगी बालू आम जनता और किसान की किमर नही तोड़ रही है जो एक-एक रुपये जोड़कर अपना आशियाना बनवाना चाहता ऐसा क्यों हो रहा है यह क्या जांच का विषय नही है बालू खनन से जुड़े ठेकेदारों को पुलिस व अधिकारियों के सो जाने का इंतज़ार रहता है रात 10 बजे के बाद इस कदर सोहावल व रुदौली में परमिट वाले बालू घाटों पर चिन्हित स्थल से अलग बालू खनन बड़ी -बड़ी मशीनों से होता है कि इसका अंदाजा भी नही लगाया जा सकता है सुबह 4 बजे तक सोहवल व रुदौली से होते हुए सुनसान सड़कों पर इन अवैध खनन की ओवर लोडिंग ट्रकों की लाईन देखी जा सकती है आखिर प्रशासन कब तक चुप रहेगा और सोशल मीडिया और टीवी सहित समाचार पत्रों में अवैध खनन की छप रही खबरें व ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर नजरअंदाज करता रहेगा यह एक अहम सवाल है जो भविष्य के गर्त में है सूत्रो की तो जिस जमीन पर खनन का पट्टा हुआ जल मग्न है लेकिन खनन लोगों के खाते से हो रहा है



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