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आजाद हो गया भारत हमसे बोला गया झूठ !



लेख  :बर्ष 1947को हमारा देश आजाद हो गया और बर्ष 1950 को संविधानिक दर्जा प्राप्त होकर गणराज्य की मान्यता से हिन्दुस्तान को नवाजा गया ।लेकिन देश के राजनीतीज्ञ ये बात कैसे भूल गये की जनता को हम झुठ कह रहे है इस बात से हमारी सास्कृती  को ठेस पहुचेगी ।जिस देश मे गुलामी के वक्त के कानून को बाखुबी से निभाया जाता हो वह कैसे आजाद माना जाएगा ।जिस कानून से बधकर कर्मचारी अपने परिवार के साथ न रह सके वह कैसे आजाद कहेगे अपने आपको ।मै पछुना चाहिता हूँ नेताओ से कि ये बात सही है कि सभी देशो के संविधान से कुछ सिखकर ही हमारा संविधान बना ।लेकिन ये तो सही नही कि जो कानून को अग्रेज बना गये उसी को तुम दोहरा रहे हो चला रहे हो तो कैसे भारत आजाद हो सकया है ।1861 मे बना पुलिस एक्ट कानून आज भी भारत मे लागू है तो क्यू।क्यू छात्रो को विधालय मे पढाया जाता है कि देश आजाद है ।क्यू नेता भाषण देते फिरते है भारत आजाद है ।क्यू खुद खाकी वाले जश्न ए आजादी मनाते है ।क्यू छला गया मेरे भारत को ।है इसका किसी के पास जबाब ।हा जब तक देश से ये 1861 का कानून न हठेगा तब तक उन वीर शहीदो की आत्मा इंसाफ के लिए भटकती रहीगी जिन्होंने देश की आजादी के लिए पुलिस की लाठीयो के प्रहार से अपनी जान गवाई ।क्रांतिकारी वीर लाला लाजपतराय की हत्या इसी कानून के तहत हुई और आज आजादी का ढोल पिटने वाले नेताओ से इतना न हो सकाकि इस 1861 के कानून को समाप्त कर लाला जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जाए ।चंदशेखर के बोल आज भी गुजते है जब उन्होंने युवाओ से कहा कि मे इस आजादी के जश्न मे मै रहु या न रहू लेकिन आजादी पाते ही इस पुलिस एक्ट को समाप्त कर देना जिसकी वजह से न जाने कितने क्रांतिकारी वीर अमर हो गये ।आजादी के वीर शहीदो का अपमान करती सरकारो के पास है कोई जबाब कि क्यू न 1861समाप्त किया गया ।हा इन सरकारों को पता है कि 1861समाप्त हुआ यो हम भी कानून मे बंध जाएगे ।साथियों उनके दर्द को कौन देख रहा जो इस पुलिस एक्ट से गुजर रहे है ।परिवार की आखो का तारा पुलिस मे भर्ती होता है लेकिन जिस दिन वह भर्ती होता है उसी दिन से वह अग्रेजो का गुलाम हो जाता है ।उसके अरमानो पर पानी फेर दिया जाता है ।समय पर खाना भी मिलता ।समय पर सोना भी मिलता ।ये हालत कर दी 1861के कानून ने ।एक सिपाही जो बंधा है 1861के गुलाम कानून से वह अगर खिलाफत मे आवाज उठाए तो उसे निलम्बित कर दिया जाता है ।भारत आजाद है कहने वालो भारत आजाद तब तक नही होगा जब तक 1861का कानून समाप्त न हो जाए ।सिपाहीयो एक साथ हुकार भरो और दिखादो कि हम 1861के कानून के गुलाम नही रहेगे ।

अश्मनी विश्नोई

स्योहारा बिजनौर

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