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प्रभु के आते ही टूट जाते है माया मोह का बंधन :आचार्य रमेश चन्द्र


भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर रामकथा में झूमे श्रद्धालु
शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ । गजेन्द्र ने जो प्रार्थना पिछले जन्म में सीखी उसी के कारण उसका कल्याण हुआ। वह भी जब उसका देह अहंकर मिट गया। जो मनुष्य अहंकर रहित हो जाता है उसे भगवत प्राप्ती हो जाती है।नगर के सहोदर पुर पूर्वी मे शारदा प्रसाद पाण्डेय व श्रीमती रामसंवारी पाण्डेय के आयोजन में चल रही श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक पंडित आचार्य रमेश चन्द्र पाण्डेय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। उन्होंने गजेन्द्र मोछ की कथा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि गजेन्द्र मोछ स्तोत्र के पहले श्लोक से हमे यह शिक्षा मिलती है कि प्रभु का स्मरण, भक्ती कभी व्यर्थ नहीं जाती। क्योंकि गजेन्द्र ने जो प्रार्थना पिछले जन्म में सीखी उसी के कारण उसका कल्याण हुआ। वह भी जब उसका देह अहंकर मिट गया। जो मनुष्य अहंकर रहित हो जाता है उसे भगवत प्राप्ती हो जाती है।उन्होने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मानव दान में पूर्णता आ जाती है, तब भगवान स्वयं याचक बन कर आ जाते हैं और चरण कमल से कल्याण करते हैं। द्वारपाल बन कर उसकी रक्षा करते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान कृष्ण का जन्म हुआ पूरा पांडाल श्री कृष्ण के जयकारों से गूंज गया। कथा व्यास ने कहा कि प्रभू के आते ही माया मोह के बन्धन टूट जाते हैं और संसार रूपी कारागार से मुक्त हो जाता है। भक्ती रूप जमना में आकंठ निमग्न हो जाता है। कथा के दौरान कृष्ण जन्म उत्सव और भजनों पर श्रद्धालु जमकर नाचे। भगवान को माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया। इस दौरान श्याम सुन्दर पाण्डेय, अरविन्द शुक्ला, शिवशंकर शुक्ल, मलय शुक्ल, रंजना, मंजू, पायल, बंदना समेत सैकडो श्र्दालुगण मौजूद रहे ।

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