बहराइच। प्रदेश में लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के निर्देशन में ऐम्स के साथ-साथ मेडिकल कॉलेजों को खुलवाने पर जोर दे रही है। प्रदेश के हर जिले के ग्रामीण अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था को बनाये रखने के लिए डॉक्टरों की तैनाती भी जोरो पर है, और तो और इन्ही ग्रामीण अंचलों में मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र पर सरकार काबिल डॉक्टरों को नियुक्त कर हर उस स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा देने का प्रयास कर रही है,
जिसकी ग्रामीण इलाकों में सख्त जरूरत है। मगर सरकार की मंशा व अन्य सरकारों में भृष्ट हो चुके सरकारी नुमाइंदे आज भी सुशासन ना लाने की कसम खाते हुवे कुशासन बरपा रहे हैं, जी हाँ आपको बता दे यूँ तो भगवान की उपाधि प्राप्त किये हुवे डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर इस लिए भेजे जाते है ताकि वह उस इलाके के बीमार गरीबो की सेवा कर सरकार की ढ़ी हुई स्वास्थय सुविधा को धरातल पर ले कर आ सके व अपने उस ग्रामीण क्षेत्र को निरोग कर खुशहाली ला सके। यूँ तो योगी सरकार के प्रदेश में काबिज होने के बाद ही सरकारी कर्मचारियों पर कसी गयी नकेल से तो एक पल ऐसा लगा था कि प्रदेश में हर विभाग के कर्मचारी मानो रातो-रात राइट टाइम हो गये है। सरकारी दफ्तरों में हो रही घूसखोरी,सरकारी दफ्तरों में सफाई व्यवस्था, सरकारी कर्मचारी के वेश भूषा हो या सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों का धूम्रपान योगी सरकार के आटे है शुरुवाती दिनों में ऐसा किया गया कि प्रदेश में ये सारी व्यवस्थाएं अपने सही ढ़र्रे ओर आती दिखाई देने लगी। फिर वो चाहे चिकित्सालय हो या कोई अन्य सरकारी दफ्तर,सरकारी कर्मचारी का दफ्तर पर समय से पहुंचना योगी सरकार की प्रशंसा का विषय लोगो के बीच बना रहा। लेकिन पिछली सरकारों भ्रष्ट हो चुके कुछ चुनिन्दा डॉक्टर आज भी ग्रामीण इलाकों में बैठ कर प्राइवेट प्रेक्टिस करते हुवे योगी सरकार को दिन दोपहर बदनाम करने में लगे हुवे है।बताते चले मामला प्रदेश के इण्डो-नेपाल बॉर्डर से सटे जिला बहराइच के थाना रुपईडीहा क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाले बाबागंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है,जहां ग्रामीणों द्वारा की गयी मौखिक शिकायत पर वास्तविकता की पड़ताल करने पहुंचे एक दैनिक समाचार पत्र के ब्लॉक रिपोर्टर ने जब स्वास्थ्य केंद्र की वास्तविकता देखी तो उससे रहा नहीं गया। स्वास्थ्य केंद्र से नदारद डॉक्टर के बारे में पड़ताल करने पर पता चला कि डॉक्टर अपने सरकारी आवास पर आराम फरमा रहे हैं, सरकारी दफ्तर के समय मे अपने ओपीडी कक्ष से नदारद डॉक्टर से जब मिलने रिपोर्टर उनके आवास पहुंचा तो दिखा डॉक्टर का पूरा खेल। सरकारी आवास पर अपनी प्राइवेट क्लिनिक चला रहे डॉक्टर ने रिपोर्टर से बदसलूकी करते हुवे चिकित्सालय से चले जाने को कहा। ओपीडी कार्यकाल के समयांतराल में कई जा रही प्राइवेट प्रेक्टिस की जब खबर बनाने के लिए रिपोर्टर ने कैमरा चलाया तो अपने आवास से निकल डॉक्टर व उनके चमचों ने धमकी देते हुवे रिपोर्टर को चले जाने को कहाँ। किसी प्रकार पूरा मामला समझ कर जब रिपोर्टर खबर लिखने का हौसला इकठ्ठा कर पाया तो उसे फोन पर भी धमकियां मिलने लगी। बाबागंज ब्लॉक जैसे ग्रामीणी क्षेत्र में बैठे डॉक्टर विवेक सिंह ने अपनी गाड़ी कमाई के बीच रोड़ा बनता देख राजकुमार शर्मा रिपोर्टर को रास्ते से हटाने के लिए उस पर जान लेवा हमला तक करा दिया। ग्रामीण इलाकों में समस्याओ पर ग्रामीणों के साथ खड़े रहने वाले पत्रकार को लहूलुहान हालत में छोड़ डॉक्टर विवेक के हमलावर भाग गये, जिसके बाद राजकुमार शर्मा ने डायल 100 को फिन कर पूरे मामले की जानकारी दी जिसके बाद घटना स्थल पर पहुँची यूपी डायल 100 ने घायल राजकुमार को गाड़ी में बौठे रुपईडीहा थाने पहुँचाया जिसके बाद पीड़ित से मिल एसओ ने तहरीर प्राप्त कर कार्यवाही को आगे बढ़ाया है। अब एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या ईश्वर के पदवी पा चुके डॉक्टरों के लिए ये कृत उचित है? ग्रामीणों की मेहनत मि कमाई को लूटने वाले ऐसे डॉक्टरों पर क्या प्रशासन कोई कार्यवाही करेगा ये तो वक्त ही बताएगा।



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