डॉ ओपी भारती
वजीरगंज (गोंडा) :- क्षेत्र के ग्राम पंचायत नौबस्ता में कोटा प्रकरण गम्भीर संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। यदि समय रहते इसका पटाक्षेप न किया गया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।
घटना की शुरुआत गांव के कोटेदार सानलाल की मौत के बाद नयी कोटे की दुकान चयन से हुई। मृतक कोटेदार के पुत्र देवीदीन ने मृतक आश्रित होने का दावा करते हुये कोटे की दुकान की मांग की , जो प्रधान पक्ष के लोगों को नागवार गुजरी , और चयन विवादों में फंस गया। विवाद बढ़ता देख तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर ग्राम पंचायत में खुली बैठक कर कोटा विवाद निपटाने का निर्देश दिया। बैठक में मृतक आश्रित देवीदीन के दावे को खारिज करते हुए नये कोटेदार की चयन की औपचारिकता पूरी कर दिसम्बर 16 में दुकान का आवंटन भी कर दिया गया। सत्ता परिवर्तन के बाद बीते सितम्बर में वितरण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए दुकान निलम्बित कर दिया गया तब से एक पक्ष जहां की बहाली को लेकर प्रयासरत है तो दुसरा पक्ष दुकान निरस्त कराने के लिए एड़ी चोंटी का जोर लगाये हुए है। विवाद के पटाक्षेप के लिए जिलाधिकारी ने सक्षम अधिकारी के देख-रेख में खुली बैठक कर विवाद का निस्तारण का निर्देश दिया था, जिसके लिए अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में ही दोनो पक्ष आपस में भिड़ गये। खूब लात-मूके चले पत्थर बाजी भी हुई एक पक्ष द्वारा फायरिंग का आरोप भी लगाया जा रहा है। एह सब कुछ अघिकारियों की मौजूदगी में हुई। सवाल उठता है कि बिना सुरक्षा व्यवस्था के अधिकारी मीटिंग करने क्यों गये। यदि इस विवाद में कोई गम्भीर घटना जाती तो इसकी जवाबदेही किसकी होती। यदि विवाद का पटाक्षेप नही किया गया तो गांव में गम्भीर घटना का पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है।


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