कटरा गुलाब सिंह में हुआ कवि सम्मेलन एवं मुशायरा
शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ । जिले के कटरा गुलाब सिंह में अखिल भारतीय सद्भावना कवि सम्मेलन एवँ मुशायरे के मँच पर देश के कोने कोने से पधारे कवियों,शायरों ने एक से बढ़ कर एक रचनायें पढ़ी, मुकामी कवि, सँयोजक, एवँ सचालक डा. अशोक अग्रहरि की बाड़ी बन्दना से आगाज एवँ उद्घाटन अतिथि के रूप मे तशरीफ फरमा अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी बसन्त लाल की कौमी एकता पर गीत ने मँच को ऊँचाई देना जब शुरू किया तो खचाखच भरे हजारों श्रोताओं की भीड़ ने तालियां बजाकर हौंसलाअफजाई करने मे कोई कमी भी नहीं की, आकाशवाणी इलाहाबाद से सम्बद्ध गीतकार एवँ सँचालन कर रहे डा. अशोक अग्रहरि ने नेकनीयत होने तथा इन्सानियत पसन्द होने पर जब रचना पढा़" ये घर बँगला हवेली आशियाना छूट जायेगा, ये मन्जर खूबसूरत औ सुहाना छूट जायेगा, कभी कुछ काम नेकी का किया कर तू यहाँ पगला, मुकम्मल है नहीं कुछ भी जमाना छूट जायेगा" जब पढा़ तो लोग आह्लादित हो उठे, लोकभाषा के राष्ट्रीय रचनाकार अनीस देहाती की रचना" सब पै किरपा कै होया तौ अपनौ बेड़ा पार किहा" ने कौमी एकता को बल दिया, तो बाराबंकी से पधारे गीतकार आशीष सोनी के ब्यँग गीत" दाल और सब्जी हो गई महँगी बहुत, खुल को तनहा देखकर ये रोटियां खामोश हैं" ने महँगाई पर कड़ा कटाक्ष किया, बेटियों पर गीतकार गजेन्द्र सिंह विकट की रचना "बेटियाँ हैं हमारी लहर की तरह, ये हैं पावन किसी देवघर की तरह" ने बेटियों के प्रति सँवेदना का अप्रतिम सँचार किया, डा. अरुण रत्नाकर ने नफरत, फितरत पर कुछ यूँ कटाक्ष किया" नफरतें करना तुम आज से छोड़ दो, द्वेष की भीत तूम आज से छोड़ दो, मुख्य अतिथि अग्रहरि महासभा उ. प्र. रमेश अग्रहरि कौशाम्बी, बिशिष्ट अतिथि डिप्टी कमिश्नर जी. एस. टी. अरणेश सिंह कानपुर रहे, तथा उद्घाटन अतिथि अपर पुलिश अधीक्षक पश्चिमी बसन्त लाल भी कविता पाठ करने से अपने को रोक नहीं सके, विश्व कल्याण की बात करते हुये, सद्भावना, सौहार्द, समरसता की प्रबल पैरवी करते हुये समाज मे ब्याप्त भेदभाव तथा बोमनस्यता को जड़ से खत्म करने पर जब तरन्नुम मे गीत पढ़ना शुरू किया तो लगा कि इतना बड़ा अफसर होने के बाद भी मिजाज इन्सानियत से पूर्णतया लबरेज़ ही नहीं जमीनीं सच को करीब से देखने का माद्दा भी कियना गजब का है, मँच की सदारत जनपद के गौरव पूर्व सहायक जिला विद्यालय निरीक्षक रचनाकार डा. दयाराम रत्न तो अम्मा साहब ट्रस्ट के ट्रस्टी आनन्द मोहन ओझा का भी अभिनन्दन हुआ, अन्य कवियों मे सँतोष सँगम, बाबू लाल सरल, प्रतिमा दीक्षित, पुष्कर सुल्तान पुरी, अनिल सागर, हुमा अक्सीर, रफी तनहा, नरकँकाल, अखिलेश द्विवेदी, सँदीप सरारती, आशुतोष दीपक के साथ अन्य कवियों ने महफिल को अन्त तक रोचक बनाये रखा, डा. समज शेखर , भैरो प्रताप सिंह मैनेजर साहब, ललन सिंह, पू. प्रा., अ. ज.इ. का. भारत सिंह, बटुक, उमेश फौजी, सँजय ठठेर, भारत सिंह.घनश्याम, प्रदीप सोनी मैनेजर बी. ओ. बी. की गरमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को निर्विघ्न सम्पन्न कराने और सफल बनाने मे समुचित भूमिका अदा की, कार्यक्रम का सँचालन, सँयोजन मुकामी कवि डा. अशोक अग्रहरि, प्रतापगढ़ी ने की ।

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