गोण्डा। बीटीसी के छात्र हो या प्रशिक्षु अथवा शिक्षामित्र, सबके सब आगामी शिक्षक चयन परीक्षा को लेकर भारी उलझन में हैं। इनके सामने समस्या यह है कि परीक्षा का अधिकृत स्वरूप, पैटर्न और नमूना भी उपलब्ध नहीं है, तैयारी किस आधार पर करें
प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के चयन का तरीका अब बेहद कठिन कर दिया है। प्राइमरी का शिक्षक बनने के लिए शैक्षिक मेरिट पर चयन उपरान्त बीटीसी करने के बाद टीईटी परीक्षा पास करने के बाद भी अब टीचर नहीं बा जा सकता। अब टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद शिक्षक चयन परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ेगी। यह चयन परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने के बाद भी नौकरी की गारंटी नहीं होगी। पद खाली होने पर चयन परीक्षा के अंकों तथा शैक्षिक योग्यता के अंकां को मिलाकर बनी मेरिट में स्थान पाने पर ही चयनित हो सकेंगे।
देवीपाटन मण्डल के चारों जिले पिछड़े हंै। यहाँ उच्चस्तरीय कोचिंग की सुविधाएं नहीं है। काउंसलिंग की भी सुविधा नहीं है। और उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षक चयन परीक्षा की अनिवार्यता कर दी है। परीक्षा कब होगी यह किसी को पता नही है। परीक्षा के विषय तो तय हो गये है किन्तु किस प्रकार के प्रश्न आयेंगे, किस टाॅपिक से कितने प्रश्न होंगे, यह पता ही नहीं है। परीक्षा में किस विषय के कौन-कौन से टाॅपिक से प्रश्न आयेंगे, यह भी घोषित नहीं है। न तो विभागीय गाईड लाइन जारी है और न अभी तक बाजार में ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित सिलेबस इतना भारी भरकम है कि दाँतें फूटना बहुत ही कठिन है। जिस पर तुर्रा यह है कि कम्प्यूटर टेक्नालजी की जानकारी न होने पर अभ्यर्थियों को मायूस होना पड़ सकता है।


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