पूरा पैसा जमा करने पर देते लास व नवजात बच्चे
गोण्डा। जिले में हजारों की संख्या में नरसिंग होमों का संचालन गली मोहल्ले से लेकर शानदार विल्डिंगों में चलाया जा रहा है। जिनमें कुछ की निगाहे केवल मरीजों की जेब पर होती है। उनसे किस तरह से पैसा वसूला जाये मुख्य मकसद होता है। यदि आपके मरीज की मृत्यु भी हो जाये या फिर नवजात शिशु को ले जाना हो, तो बिना पूरा पैसा जमा कराये बाहर निकलने नही देते।
बताते चले कि जिले के कुछ शानदार भवनों एवं सारे सुविधाओं से लैस नर्सिंग होमों में गरीब व मध्यम वर्ग का मरीज पैसे के खर्च को देख मध्यम श्रेणी के नर्सिंग होम में भर्ती कराकर इलाज कराता है, तो मरीजों की भूल होती है। मध्यम श्रेणी के नर्सिंग होम कम पैसे बता कर अधिक की वसूली करते। यदि आपके पास पैसा कम पड़ जाये तो आपको बन्धक बनाने का भी कार्य करते हैं। बिना पूरा पैसा वसूल किये मृतक का शव तक नहीं देते और यदि किसी महिला को बच्चा पैदा हुआ है और तीमारदार उसके द्वारा तय किये रुपये की ही व्यवस्था की जाती तो उसे अपने बच्चे को नर्सिंग होम में पैसे की व्यवस्था करने तक कैद रखना पडे़गा।
जी हाँ, मुख्यालय पर इमलिया गुरुदयाल में स्थित नवीन गल्ला मण्डी के सामने एक नर्सिंग होम ऐसे मामलों में सबसे आगे है। हम बात करते हैं बलरामपुर निवासी जुगुल किशोर की जिनकी पत्नी पांचवीं बार आॅप्रेशन से बच्चा होना था। डाक्टर ने बीस हजार रुपये में आॅपरेशन लेकर भर्ती व दवा का खर्च बताया। युगुल ने बीस हजार की व्यवस्था कर नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया। अस्पताल में भर्ती होते ही जांच के लिए पांच सौ रुपये वसूला गया। आॅपरेशन हुआ और बच्चा पैदा होते ही उसे पीलिया कहकर आईसीयू वेन्टीलेटर में रख दिया गया जिसका दो दिनों में नौ हजार रुपये अलग से वसूला गया। इस तरह से देखा गया कि बीस हजार तय कर उनतीस हजार रुपये की वसूल की गयी।


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