सुनील उपाध्याय
बस्ती। तथाकथित झोला छाप डाक्टरों को प्रशिक्षण देकर उन्हे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक बनाकर सम्मान दे दिया जाये जिससे मृत्यु दर भी कम हो जायेगी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार भी होगा। यह बातें ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक वेलफेयर एसोसियेशन उ.प्र. के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रेम त्रिपाठी ने कहीं।
वे प्रेस क्लब सभागार में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होने आगे कहा कि अन्य राज्यों बिहार, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, तमलिनाडु में यह प्रयोग चल रहा है, वहां ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को समय समय से प्रशिक्षण देकर प्राथमिक उपचार के लिये निपुण बनाया गया है जिसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं।
उन्होने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में भी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को प्रशिक्षित कर उन्हे ग्रामीण चिकित्सक के रूप में तैनात किये जाने के लिये प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा गया है। संगठन की ओर से मांग किया गया है कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय का गठन कर विशेष पाठ्यक्रम के जरिये झोला छाप डाक्टरों को सशुल्क प्रशिक्षण दिया जाना समाज के हित में है। इससे झोला छाप डाक्टरों की जवाबदेही तय होगी और प्राथमिक उपचार के अभाव में असमय मरने वालों की संख्या घटेगी। पत्रकार वार्ता में मंडल अध्यक्ष डा. एसपी मिश्र, जिलाध्यक्ष डा. जीपी आनंद आदि उपस्थि


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