शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ । शहर के नाजिश मंजिल में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले मशहूर उर्दू शायर कवि,साहित्यकार एवं अपनी जादुई आवाज का जादू दिखाने वाले सफल संचालक डॉक्टर अनवर जलालपुरी साहब के निधन पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया । जिसमें शहर के मशहूर शायरों कवियों गीतकारों एवं साहित्यकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के आयोजक डॉक्टर मोहम्मद अनीस रहे, जबकि कार्यक्रम की सदारत डॉ दयाराम मौर्य "रत्न" साहब ने की.। खुसूसी मेहमानों में डॉ पीयूष कांत शर्मा एवं डॉक्टर विंध्याचल सिंह रहे.। संचालन करते हुए डॉक्टर मोहम्मद अनीस ने बताया कि डॉक्टर अनवर जलालपुरी साहब का प्रतापगढ़ शहर से बड़ा गहरा रिश्ता था. वह मशहूर उर्दू शायर नाजिश प्रतापगढ़ी को अपना आदर्श मानते थे.उन्होंने उनका प्रसिद्ध कौमी एकता का शेर पढ़ा की "न तेरा है न मेरा है,
ये हिंदुस्तान सबका है.
न समझी गई बात तो
नुकसान सबका है."आगे उन्होंने बताया कि इनका जन्म 6 जुलाई 1947 को अंबेडकरनगर के जलालपुर कस्बे में हुआ और उनकी मृत्यु लखनऊ के ट्रामा सेंटर में 2 जनवरी 2018 को हुई.आप एक अंग्रेजी के प्रवक्ता थे. लेकिन उर्दू हिंदी और अंग्रेजी कि आप चलते फिरते इनसाइक्लोपीडिया थे.अपनी जादुई आवाज के माध्यम से वह मुशायरा और कवि सम्मेलन को कामयाब कर देते थे.अपनी शायरी के माध्यम से उन्होंने मुल्क में कौमी एकता आपसी भाईचारा और मेल- मोहब्बत को बढ़ावा दिया. आपको 2015 मै यश-भारती एवं अन्य प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. आप ने लगभग 13 किताबें लिखी है. आपने गीता का हिंदी में अनुवाद किया और उसको शायराना ढंग से पेश करने की कोशिश की है.आपने टीवी सीरियल और फिल्मों में भी काम किया."अकबर द ग्रेट" मैं अपनी जादुई आवाज को जगाया.अध्यक्ष महोदय ने कहा कि अनवर साहब साहित्य जगत के हिमालय की तरह थे. उन के चले जाने से साहित्य में एक सूनापन गया है.उन्होंने उनका मशहूर शेर पढ़ा की "प्यार की शबनम आयत में, प्रेम का अमृत हर एक श्लोक. फिर क्यों इंसान खून का प्यासा,मैं भी सोचूं तू भी सोच." डॉ पीयूष कांत शर्मा जी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके इस मशहूर शेर को पढ़ा "हम जितने भारतवासी हैं, सबका सब का यह नारा बाबा.हम काशी काबा के राही,हम क्या जाने झगड़ा बाबा."डॉक्टर विंध्याचल सिंह ने खिराजे अकीदत पेश करते हुए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा चमकता हुआ सितारा बताए जिसके साहित्य जगत से चले जाने पर साहित्य जगत सुना हो गया है और उनका मशहूर शेर पढ़ा "ख्वाहिश मुझे जीने की ज्यादा भी नहीं है,वैसेअभी मरने का इरादा भी नहीं है." इस मौके पर प्रमुख रुप से मोहम्मद तल्हा ताबिश, सिद्धार्थ श्रीवास्तव,एडवोकेट सलीम अहमद ,शम्स तबरेज,जमील अहमद, मोहम्मद फरीद, राकेश कनोजिया आदि उपस्थित रहे.


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