गोण्डा। महज 24 घण्टें के भीतर दुराचार के आरोपी कृपाल की लाश एक बिजली के टावर से लटकती मिली मृतक के दोनों हाथ पीछे बंधे थे। सुसाइड नोट में उसने अपने मरने का जिक्र नही किया जिससे आत्महत्या की कहानी सवाल के घेरे में है। जबकि पीएम रिपोर्ट में लटकने से मौत की पुष्टि हो चुकी है।
बीते मंगलवार की सुबह देहात के कोतवाली के गांव डोमीकल्पी निवासी कृपाल उर्फ पाले की गांव से थोड़ी दूर स्थित बिजली के टावर से उसकी लटकती हुई लाश मिली। मृतक के दोनों हाथ पीछे की तरफ बंधे थे जिससे प्रश्न यह उठता है कि आत्महत्या करने से पहले यदि उसने अपना दोनों हाथ बांध लिया होता तो फिर खम्भे से कैसे लटकता। उसके पास से मिले सुसाइड नोट क्या उसके द्वारा ही लिखे गये थे या फिर वह किसी साजिश का शिकार हो गया। ये ढेर सारे अनसुलझे प्रश्नों के जवाब किसी के पास नही है। बताया जाता है कि कृपाल के माँ बाप की अर्सो पूर्व मौत हो चुकी है। उसके नाम स ेचल अचल सम्पत्ति भी है। कहीं दुराचार काा आरोप लगने के बाद सम्पत्ति के सौदागरों की साजिश का शिकार तो नही हो गया। बताते चले कि गत 1 जनवरी को गांव की ही एक लड़की को नशीला पदार्थ खिलाकर दुराचार करने का आरोप लगा था। कहा जाता है कि पीड़िता ने अपने बयान में कृपाल पर ही आरोप लगाये थे लेकिन अस्पताल प्रशासन व पुलिस की शिथिलिता के चलते पीड़िता की मौत हो गयी। सूत्र बताते है कि 31 दिसम्बर की रात गायब हुई पीड़िता सुबह बदहवास हालत में कृपाल के चाचा बेचा सिंह के घर पहुंची और उसने अपने मौसी के यहाँ भिजवा देने की बात कही। उसके हालत की नाजुकता को देख बेचा सिंह ने डायल हण्डेªड पुलिस को फोन कर बुलाया। मौके पर पहुंची डायल हण्डेªड की टीम ने पीड़िता को अपनी गाड़ी पर लाकर अस्पताल में भर्ती कराना मुनासिब नही समझा और कोतवाली लाने की बात कहकर टीम वापस चली आयी। परिजनों द्वारा किसी तरह उसे देहात कोतवाली लाया गया। जहाँ पर अस्पताल में पहले भर्ती कराने की बात कही गयी। परिजन पीड़िता को लेकर महिला व जिला अस्पताल का चक्कर लगाते रहें। अनततः इलाज के अभाव में पीड़िता की मौत हो गयी।


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