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बस्ती:पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में आशाओं को किया गया प्रशिक्षित


सुनील उपाध्याय 
बस्ती:राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल हेतु माड्यूल तृतीय चक्र आशाओं का पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में आशाओं को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षक डॉ राम प्रकाश  ने आशाओं से कहा कि सरकार नवजात शिशुओं को कुपोषण से बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए आवश्यक है कि उसके स्वास्थ्य का नियमित निरीक्षण किया जाय तथा उसके उसका टीकाकरण किया जाय। नवजात शिशु को कुपोषण से बचाने के लिए उसके जन्म से उसकी मां कोख में आने से ही देखभाल शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने आशाओं से कहा कि नवजात शिशु के पालन पोषण पोषक आहार तथा साफ सफाई की जानकारी मां तथा उसके परिवार को अवश्य दे। गिरजेश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा नवजात शिशु व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने हेतु प्रदेश में समुदाय स्तर पर प्रसवोपरांत मां एवं नवजात शिशु की देखभाल के लिए गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल (होम वेस्ड न्यू बॉर्न केयर-एचबीएनसी) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें आशा द्वारा प्रसव के बाद42 दिन तक छह से सात बार घर का भ्रमण कर नवजात शिशुओं एवं उनके माता की घरेलू देखभाल कर स्वास्थ को सुरक्षित रखने का तरीका सिखाती हैं।

सदर ब्लाक के के मरवटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंगलवार  को प्रशिक्षक बृहस्पति पाण्डेय आशाओं को बताया कि नवजात बच्चों की जन्म से लेकर 42 दिन तक विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस अभियान का उद्देश्य उस दौरान बच्चे व माता की विशेष देखभाल करना है। अभियान में आशा संस्थागत (अस्पताल में होने वाले) प्रसव वाले घरों का छह भ्रमण क्रमश: तीसरे, सातवें, 14वें, 21वें, 28वें व 42वें दिन करती हैं। जबकि घर में ही नवजात का जन्म होने पर आशा जन्म के दिन भी घर जाकर बच्चे के स्वास्थ्य का परीक्षण करती हैं। प्रत्येक भ्रमण के दौरान आशा नवजात का वजन1800 ग्राम से कम होना, पसली चलना, दूध आदि न पीना,सुस्त रहना, शारीरिक तापमान का कम या अधिक होना,शरीर के किसी भी अंग से खून निकलना, 24 घंटे बाद भी नवजात का मूत्र एवं मलत्याग ना करना, लगातार उल्टी करना आदि न होने का परीक्षण करती हैं। न्यूट्रेशन इंटरनेशनल की ब्लाक समन्वयक पूर्णिमा मिश्रा ने कहा की कंगारू मदर केयर के माध्यम से जोखिम वाले नवजात शिशु को जोखिम की स्थिति से निकला जा सकता है। ब्लाक कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक अखिलेश त्रिपाठी बताया की की भ्रमण के दौरान आशा नवजात शिशु के जन्म का पंजीकरण कराकर उसका जन्म प्रमाण पत्र दिलाने और उसे बीसीजी,पोलियो की प्रथम खुराक, डीपीटी व हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना भी शामिल है। इस कार्यक्रम के लिए आशाओं को प्रति केस 250 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। प्रशिक्षण में रामकेवल सहित रेनू पाण्डेय, चंद्रा गौड़, पिंकी गुप्ता,अनीता, विमलावती, कमलावती ,मीरा,किरन, नीलम,प्रतिभा चैरसिया,रेनू,रीता देवी, आदि आशाएं मौजूद रही।

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