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सुर्खियों मे है बेल्हा की सियासत, अपना दल का गुटीय खींचतान


केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया व कृष्णा के साथ अब बलिहारी गुट वर्चस्व के मैराथन मे
शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ़। बेल्हा की सियासत मे इधर अपना दल बलिहारी के भी बढ़ते वर्चस्व से अपना दल एस भी मौजूदा वजूद बचाये रखने को लेकर सियासी गोट बिछा रहा है। अपना दल एस के जिला मुख्यालय पर हुई बैठक मे जहां केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्वयं दल की मजबूती को लेकर कमान संभाली वहीं विधायकों तथा पदाधिकारियों का जमावडा कर अपनी पैठ बरकरार रखने का संदेश देने का भरसक प्रयास किया। हालांकि अनुप्रिया के कार्यक्रम मे जिले से विधायक डा. आरके वर्मा की गैरहाजिरी ने दल को अंदर ही अंदर खींचतान का संदेश भी दिया है। वहीं हाल ही मे लालगंज मे अपना दल बलिहारी के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मराज पटेल ने कार्यकर्ता सम्मेलन कर बेल्हा मे अपने गुट का वर्चस्व कायम होने को लेकर भरपूर ताकत झोंकी। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव मे अपना दल एस से असंतुष्ट नेता धर्मराज पटेल व दिनेश शुक्ला ने रामपुर खास मे कांग्रेस को समर्थन देकर अनुप्रिया को सीधा झटका दिया था। अनुप्रिया के खुद भाजपा के समर्थन मे जनसभा करने के बावजूद कांग्रेस रामपुर खास मे भारी मतों से जीत दर्ज कराने मे सफल रही। जिले से हालांकि अपना दल से कुंवर हरिवंश सिंह सांसद है किंतु मां बेटी के झगड़े मे वह अपने को खामोश किये नजर आते है। अनुप्रिया के सामने बेल्हा मे अगले लोकसभा चुनाव मे फिर से एनडीए का टिकट हासिल करने के साथ अपना गढ़ बनाये रखने की चुनौती है तो अपना दल एस से असंतुष्ट बलिहारी गुट अनुप्रिया को बेल्हा मे परास्त करने की रणनीति पर रोज हमलावर दिख रही है। अपना दल बलिहारी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनेश शुक्ला ने तंज भी कसा है कि अनुप्रिया गुट को खुले मैदान की जगह हाल मे सम्मेलन करना पड़ा तो अपना दल बलिहारी ने खुले मैदान मे सफल कार्यकर्ता सम्मेलन कर स्वयं ही कौन मजबूत कमजोर की स्थिति बता दी है। 

तानाशाही छोड़े अनुप्रिया तब करें एका की बात:दिनेश शुक्ला
 अपना दल (ब) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनेश शुक्ला ने गुरूवार को यहां जारी विज्ञप्ति मे अपना दल (एस) के सम्मेलन को पूरी तरह असफल करार दिया है। उन्होने इसकी वजह जिले मे अपना दल (ब) के बढ़ते लगातार बर्चस्व और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का अनुप्रिया गुट की तानाशाही से मोह भंग होना ठहराया है। बकौल दिनेश शुक्ला अपना दल (एस) इं. बलिहारी पटेल और सोने लाल पटेल के विचारों से दूर हट गयी है, और यह दल अब सत्ता के मद मे डूबी हुई पति पत्नी की पार्टी मात्र रह गयी है। उन्होनें अपना दल (एस) के कथित अध्यक्ष आशीष पटेल के इस बयान माखौल उड़ाया है कि कृष्णा पटेल जी यदि अनुप्रिया जी को नेता मान लें तो कृष्णा पटेल जी अध्यक्ष बन सकती है। श्री शुक्ल ने कहा कि दामाद और बेटी ने मां जैसे पवित्र रिश्ते को न केवल ठोकर मारी बल्कि इसे कलंकित करने का भरपूर घृणित प्रयास किया है। उन्होनें कहा कि सही मायने से यदि अनुप्रिया जी एकता की बात करना चाहंे तो उन्हे सबसे पहले बिना शर्त अपनी मां कृष्णा पटेल से सार्वजनिक मांगी मांगनी चाहिये, और नैतिकता के आधार पर न केवल अपने दलीय पद से बल्कि केंद्रीय मंत्रि मण्डल से भी त्याग पत्र देकर पार्टी के सभी पदों को कृष्णा पटेल जी के हवाले कर देना चाहिये। उन्होनें कहा कि एनडीए भी अब अनुप्रिया पटेल जी से किनारा करना चाहती है। क्योकि उसे मालूम हो गया है कि विघटन का शिकार हो रही अनुप्रिया जी की पार्टी से अब अगले लोकसभा चुनाव मे भाजपा को कोई भी सियासी फायदा नहीं मिलने वाला है।

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