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खुल गई सरकारी योजनाओं की पोल , आशियाने में जिन्दा जले मासूम


सत्येन्द्र खरे 
यूपी के कौशाम्बी जिले में दो मासूम छप्पर नुमा मकान में जिन्दा जलकर मौत की आगोश में चले गए है | घटना कोखराज थाना इलाके के सैलाबी गाव की है | मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधिकारिओ के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर जाँच कर रहे है | 
फ़ाइल फोटो :मृतक 

मौत का यह मातम 12 साल के वाशिक और 8 के गुफरान की दर्दनाक मौत के बाद शुरू हुआ है | बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार बेहद गरीब है | जिसके पास अपना खुद की पक्की छत भी नहीं थी |
फ़ाइल फोटो :मृतक 
माँ वहीदा बेगम को उसके पति हैदर ने गुफरान के जन्म के बाद छोड़ दिया था जिसके बाद से वह अपने नाना के यहाँ ही जिंदगी बिता रहे थे | देर रात माँ वहीदा के साथ दोनों बच्चे वाशिक और गुफरान खेत के वीराने में छप्पर में ही थे | ठण्ड से बचने के लिए परिवार ने आग जलाई थी | जिसकी चिंगारी से निकली आग ने छप्पर नुमा मकान में आग लग गई | माँ जब तक आग पर काबू पाती दोनों बेटे जिन्दा ही आग की लपटों में घिर कर मौत का निवाला बन गए | 


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बच्चो की जिन्दा जलकर मौत की सूचना ने पुलिस महकमे में हडकंप मचा गया | आनन फानन में कोखराज पुलिस के साथ एडिशनल एसपी अशोक कुमार भी मौके पर पहुचे | घंटो की जाँच के बाद एएसपी अशोक कुमार ने मीडिया को बताया कि इस गंभीर प्रकरण की जाँच शुरू कर दी गई है | प्राथमिक कार्यवाही करते हुए कोखराज पुलिस ने दोनों बच्चो की लाश को कब्जे में लेकर पोस्ट मार्टम इ लिए भेज दिया है | 

 मुआवजे का मरहम लगा कर ....दोषियों को बचाने की कोशिश ! 

एक अदद कच्ची या फिर पक्की छत व सरकारी शौचालय के लिए तरसते इस पीड़ित परिवार के दरवाजे पर आज अफसरों और लोगो का मेला लगा है | ......बच्चो की खौफनाक मौत का मंजर देखने वाली माँ वहीदा की आँखों से पानी रुकने का नाम नहीं ले रहे है तो वही नाना अब्दुल रशीद की आँखों का पानी सूख गया है | इस मौत के मंजर के बाद सरकारी मरहम पर..... एक हिंदुस्थानी कहावत ही याद आती है ....''का वर्षा , जब कृषि सुखाने'' |  


तस्वीरे जो अपने आप में सरकार और उसकी सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को खुद-ब-खुद बया कर रही है | जिसमे साफ़ तौर पर दिखाई पद रहा है कि अब्दुल रशीद किस तरह से अपनी गरीबी के आलम में अपने शादी शुदा बेटी और उसके बच्चो को पाल रहा था | अब्दुल रशीद के पास अपनी खुद के मकान में पक्की छत नहीं है | गरीबी और मुफलिसी का आलम यह है कि पूरा परिवार घास फूस के बिस्तर पर फटे-पुराने बिस्तर पर अपनी सर्द राते बिताता था | पेट की आग बुझाने के लिए उसके पास सरकार की उज्जवला योजना का लाभ भी नहीं मिला | जिसके कारण उसे आज भी चूल्हे में ही अपना खाना बनाना पद रहा था | 

शादी शुदा बेटी वहीदा बेगम और उसके दो बेटो को बेहतर भविष्य देने के चाहत में पिता अब्दुल रशीद दिन रात मेहनत करता , लेकिन महगाई और मुफलिसी ने आलम में वह केवल पेट भरने का ही इंतजाम कर पा रहा था | जिसको देख बेटी वहीदा बेगम ने गंगा के तराई में खाली पड़ी जमीन के एक तुकडे में आनाज की खेती कर ली | खेतो को जानवर ने नस्त न कर दे इसके लिए माँ और उसके दोनों बेटे गंगा के तराई में ही रात दिन रह कर अपनी फसल की रखवाली करते थे | जहाँ देर रात ठण्ड से माँ ने अपने बच्चो की जिंदगी बचाने के लिए जो आग जलाई वही आग उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गई | 

मौत के दिल दहला देने वाली घटना की जाँच करने अब कौशाम्बी के बड़े बड़े अधिकारी पीड़ित के घर पहुचे है | जाँच-दर-जाँच का सिलसिला जारी है | सभी अफसर अपने अपने तरीके से पूरी घटना की विवेचना कर रहे है | पुलिस अधिकारी मौत के कारण जानना चाहते है तो प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार तक सरकारी योजना क्यों अब तक नहीं पहुची यह जानना चाहते है | एसडीएम सिराथू एसएन सिंह भी मौके पर पहुचे है जाँच जारी है इसी बीच मीडिया ने एसडीएम से सावाल किया तो उन्होंने पीड़ित परिवार को 4-4 लाख का मुआवजा दिए जाने का एलान करते नज़र आये | 

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