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गोण्डा:अस्था का केन्द्र है भगवान भोलेनाथ का कामेश्वरनाथ मन्दिर


रमेश कुमार मिश्र
तरबगंज गोण्डा।तरबगंज - दुर्जनपुर मध्य हाईवे मार्ग तहसील मुख्यालय से पूरब लगभग तीन किमी की दूरी वा तरबगंज थाने से मात्र 200मीटर पर भगवान भोलेनाथ का सिद्धपीठ श्रीकामेश्वरनाथ मन्दिर स्थित है।जिसकी स्थापना हुए लगभग 40वर्ष हो गये है।तबसे अनवरत साल मे दोबार पड़ने  वाली कजलीतीज वा महाशिवरात्री को अखन्ड रामायण ऊँ नमः शिवाय का पाठ लाउडस्पीकर और ढोल नगारे के साथ चलता आरहा है।

सिद्धपीठ श्री कामेश्वरनाथ मन्दिर में वैसे तो हजारो श्रद्धालुओ का हूजूम रोज रहता है।लेकिन कजलीतीज वा महाशिवरात्री के दिन दूर दराज से आकर लाखों श्राद्धालू पूजा अर्चना करते है।घंटे की आवाज वा ऊँ नमः शिवाय मंत्र से मन्दिर परिसर गुंजायमान रहता है।भोलेनाथ अपने भक्तो की मनोकामनाये पूरी करते है।मन्दिर परिसर मे भोलेनाथ के अलावा आदिशक्ति माँ दूर्गा की भव्य मूर्ति विराजमान है।मर्यादापुरषोत्म भगवान राम के अन्यन्न भक्त श्री हनुमानजी की विशालकाय मूर्ति श्रद्धालूओ के आर्कषण का केन्द्र है।श्रद्धालू बताते है।की यहाँ मुँह माँगी मुराद मन्नत पूरी होती है।वही मन्दिर के संस्थापक वा सर्वराकार श्री लक्ष्मीनरायण पाण्डेय ने बताया की यहाँ मन्दिर परिसर में कजलीतीज वा महाशिवरात्री के दिन निशुल्क चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया जाता है।जिससे क्षेत्र के गरीब वा कमजोर तबके के लोगो को सीधा फायदा पहुँचता है।और बड़ी वा छोटी बिमारियो का इलाज वा जाँच निशुल्क होती है।


पुजारी पंडित भगवान प्रसाद ने बताया कि यह व्रत आशुतोष भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है भगवानशिव भौतिक समस्त कामनाओ को पूर्ण करने वाले है इस वर्ष यह पावन पर्व 13फरवरी 2018 मंगलवार को है यद्यपि कतिपय पंचागकारो ने 14 फरवरी को भी व्रत करने के लिए कुछ तर्कदिये है पर वह तर्क ही है शास्त्र सम्मत नही कहा जा सकता क्यो कि इस व्रत मे निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी ही मान्य है इस वर्ष दोनो दिन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी है किन्तु पद्य्मपुराण का पुष्ट प्रमाण के अनुसार पूर्व का ही सर्वमान्य है "यथा=दिन द्वये निशीथ व्याप्तौ हेमाद्रिमते पूर्वा एव ग्राह्या । अन्यमपि अर्धरात्रात्पुरस्तातचेज्या योगो यदा भवेत ।पूर्व विद्धैव कर्तव्या शिवरात्रि शिव प्रियै:। स्मृतैरपि भवेत्यत्र त्रयोदश्या'भूतव्याप्ता महानिशा ।शिवरात्रि व्रतं तत्र कुर्याज्जागरणं" तथा इस अनेक शास्त्रीय प्रमाणो से यहनिर्णीत है कि 13 फरवरी को ही व्रत करना उचित है वैसे भी ज्योतिषीय दृष्टि से मंगलवार को त्रयोदशी तिथी पडने से  सिद्ध योग होता है यह जया तिथि है "भौम युक्ता जया विभाजन" शुभकारक है उपर्युक्त c प्रमाणानुसार समस्त सनातन धर्मावलम्वी महानुभाव औढरदानी भगवान शिव के प्रसन्नतार्थ 13 फरवरी मंगलवार 2018 को ही शिव रात्री व्रत करके भगवती सती के पति को प्रसन्न करके कृपा पात्र बना जा सकता है।
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