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जुदाई लाख हो लेकिन मुहब्बत कम नही होती


गोंडा:-रायलसन पब्लिक इंटर कॉलेज भोपतपुर में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं न्यायिक अधिवक्ता हरीराम शुक्ला और भूतपूर्व प्रवक्ता वासुदेव त्रिपाठी ने संचालन डॉ.वी.एन.शर्मा ने किया। गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना से हनुमान दीन पाण्डेय 'बेधड़क' ने किया।

युवा कवि सुधांशु गुप्त 'बसंत' ने बसंत ऋतु पर दोहा पढ़ा- कलियों की आंखे खुली, मधुप करे गुंजार। सूने उपवन खिल उठे, बही बसंत बयार।। 
डॉ.वी.एन.शर्मा ने बसंत ऋतु पर पढ़ा-
जीवन का एहसास जगाने आता है मधुमास।धरती पर मुस्कान लुटाने आता है मधुमास।।रचना पढ़ी।
युवा कवि रघुभूषण तिवारी ने आतंकवाद के विरुद्ध काव्य पाठ किया - मेरे देश में जो भी आये,घुसकर आतंक मचाए।ऐसा पाठ पढ़ाऊँ उसको, अंत समझ न आए। हरीराम शुक्ला ने पढ़ा - आओ हे ऋतुपति भइया भंवरवा मनकि मंडरावै।पियरी पहिरि सरसैया लागि तक नाचै औ गावै।।सूरज लाल गुप्ता ने पढ़ा - 
सबनम गिरे फूल पर पत्ती नम नही होती।जुदाई लाख हो लेकिन मुहब्बत कम नही होती।।अनन्त शुक्ला 'अनंत' ने समसामयिक रचना पढ़ी-
प्रिय मै तेरा वैलेन्टाइन।तुम चन्द्रमुखी मै सन शाइन।।
प्रिय मै तेरा वैलेन्टाइन।युवा कवि सुधीर गुप्ता ने पढ़ा - अब्सार मिलाकर अब्सार चुरा लेंगे हम।तस्वीर से तेरे दिल को चुरा लेंगे हम।।
वरिष्ठ कवि राम बक्स 'सरल' ने  पढ़ा - 
क्या यही वसंत है?बिरछा के पात झरे, बात खुराफात करे।मधु के फुहार परे, कोकिला सु सूर भरे।।
अगिया लगाये टेसू, दहकी दिगन्त है।क्या यही वसंत है? हां यही वसंत है।। जोखूराम मौर्य ने पढ़ा-लागे फगुनवा वसंत ऋतु आयी है,मौसम सुहाना कैसी अजब सी छायी है।कृषक सब कृषि देख मन में हरषाए रहे,हरी-भरी शस्य देख मन ही मन गाए रहे।।
युवा कवि मनोज तिवारी ने अगर जज्बा है तो,मुश्किलों का हल निकलेगा।जमीं बंजर हुई तो क्या,इसी में जल भी निकलेगा।।रचनाएं पढ़ी। गया प्रसाद वर्मा, राम नरायन शर्मा, अर्जुन शुक्ल, मोतीलाल गुप्ता, मनीष कुमार मौर्य, हरीश गुप्ता, सूरज पटेल, प्रदीप वर्मा, मालबाबू पाण्डेय आदि लोग उपस्थित रहे।

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