Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

संस्कार ही जीवन का परम धन :अलोकानंद शास्त्री जी


अलीम खान 

अमेठी :मुसाफिरखाना। मानव अपना संस्कार भुल गया है जिसके वजह से उसका जीवन दुखी है यह बाते कथा वाचक अलोकानंद शास्त्री जी ने हिंगलाज मंदिर के प्रांगण में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के अंतिम दिवस श्रोताओ के समक्ष कही। कथाब्यास अलोकानंद शास्त्री ने दुंध कारी मोक्ष,जड़भरत कथा,प्रहलाद जी रुक्मणी बिबाह राजा बलि 52 की कथा गोवर्धन पूजा परिक्षित मोक्ष सुदामा चरित्र आदि जैसी कथाओ का वर्णन कर सभी के चरित्रो पर प्रकाश डाला।अलोकानंद शास्त्री ने कथा में भक्तो को हनुमान जी की कथा का महिमा गाते हुए  बताया कि बिभीषण हमेशा सोता रहा पर जब हनुमान जी जैसा संत जीवन मे आया तो वह राम काज के लिए प्रयत्नशील  हुआ और अपने संस्कार को समझा हमे भी चाहिए की हमे भी  वैसे हमे अपने इस मानव जीवन के पहलुओ को समझना चाहिए और संस्कार से समाज का सेवा करना चाहिए। भागवत शास्त्र का आदर्श दिब्य है भक्ति केवल मंदिरो में नही जहाँ बैठ जाओ वही है दुःख मन का धर्महै आत्मा का ज्ञान नही।सुख दुःख तो मन की कल्पना है ।उन्होने अंतिम शब्दों में कहा कि गौ दान से बड़ा कोई दान नहीं गौ माता के शरीर में समस्त देवताओ का वास होता है गौमाता के गोबर से लेकर दूध अर्थात गाय के शरीर से प्राप्त सभी तत्वों से लाभों का बखान करते हुये लोगो के समझ कही।
इस मौके पर एमएलसी दीपक सिंह जनसेवक शिवकुमार सिंह कृपाशंकर अंजनी मोहित गुप्ता प्रशांत रवि सिंह अनुराग पं शेषराम मिश्र राहुल गुप्ता जनार्दन तिवारी विपुल सिंह शिवभान निषाद आदि गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे