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वरुण गांधी ने फिर कसा अपनी पार्टी पर तंज़, बोले लोकतंत्र का मतलब नहीं कुछ लोगों के हाथ में बहुत सारी ताक़त''


खुर्शीद खान 
सुलतानपुर (यूपी). बीजेपी नेता एवं ज़िले के सांसद वरुण गांधी बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र के एक दिवसीय दौरे पर थे। यहां वरुण गांधी ने अपनी ही पार्टी पर तंज़ कसते हुए कहा कि ''लोकतंत्र का मतलब है हर आदमी के हाथ में ताकत, लोकतंत्र का मतलब नहीं है कुछ लोगों के हाथ में बहुत सारी ताक़त।'' 

आगे पढ़े वरुण गांधी ने कहीं कौन-कौन मुख्य बातें...

सांसद वरुण गांधी ज़िले के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित बार एसोसिशन के आफिस में आयोजित होली मिलन समारोह लोगों को एड्रेस कर रहे थे। 
''मैं राजनीति में नाम व पैसा कमाने के लिए नहीं आया हूं,  राजनीति सेवा करने का एक रास्ता है, जंग नहीं और जिस दिन भी मेरे ऊपर दो रूपये का आरोप लगेगा मैं राजनीति को ठोकर मार दूंगा।''
एक आम आदमी के सुकर्मों से, 
एक आम आदमी के ताक़त से परिवर्तन आ सकता है लेकिन उस परिवर्तन को लागू रखने के लिये संस्था का गठन ज़रूरी है। ताकि एक आदमी की अच्छाई-बुराई पर पूरा गेम निर्भर न हो। 


क्या मैं सही कह रहा या ग़लत? लोग बोले सही कह रहे। 
वरुण ने कहा की मैने एक चिट्ठी लिखी है, मैने कहा है कि जितने सांसद-विधायक 15 करोड़ से ज़्यादा घोषित सम्पत्ति है कम से कम उनके बीच में माननीय अध्यक्ष जी आप ये आंदोलन चलायें के आप स्वयं से अपनी तनख्वाह को त्याग कर दीजिए। 'देश में एक हज़ार करोड़ रुपए की बचत होगी।' 
मैने तो आजतक तनख्वाह नहीं ली, और मैने अपने वेतन से एक पैसा नहीं दिया, ''मैने अपने पैसे से दिया है।'' जो कुछ भी मैने दिया है सुल्तानपुर को, क्योकिं मैने वेतन लिया ही नहीं। 
इशारों-इशारों में अपनी पार्टी पर बड़ा हमला करते हुए उन्होंंने सवाल दागा- अगर किसी सांसद या विधायक के बनने के बाद मर्डर के चार्जेज हो, रेप के चार्जेज हो, लोगों के ज़मीनों के ऊपर कब्ज़ा करने के चार्जेज हो क्या उसको बनना चाहिये? 

पिता का नाम लेकर सुलतानपुर से जोड़ा अपनत्व का रिश्ता
उन्होंंने कहा कि मैं चाहता हूं कि समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान हो। सुलतानपुर भ्रष्ट्राचार मुक्त जिला बने। उन्होंंने ज़िले से पैतृक रिश्तों की धारा को जोडते हुए कहा मैंनें अपने पिता स्व. संजय गांधी को नहीं देखा है, लेकिन सुलतानपुर जिले में उन्हीं की यादों के सहारे पहुंचा हूं। सुलतानपुर रायबरेली अमेठी के लोग मेरे परिवार के लोग हैं। जब चाहें दिल्ली आकर अपनी समस्या बता सकते हैं। मैं उनके सुख-दुख में हमेशा खड़ा मिलूंगा।
यहां उन्होंंने पोस्ट आफिस में बने पासपोर्ट कार्यालय का लोकार्पण भी किया।

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