खुर्शीद खान
सुल्तानपुर. यहां प्रसिद्ध कवि पं. रामनरेश त्रिपाठी की 130वीं जयन्ती के अवसर पर जिला एकीकरण समिति के बैनर तले जिला पंचायत सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में लोगों को एड्रेस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा ने कहा कि कावियों की रचना भी हमारे कल्चर को संवारने में अहम योगदान रखती हैं। उन्होंंने कहा कि सदियों पुराने या आज के कवि, उपान्यासकार जिस तरह शब्दों को अपने काव्य में पिरो कर हम तक पहुंचाते ये काम आसान नहीं है।
कवि डॉ. डीएम मिश्र ने की अध्यक्षता
आपको बता दें कि आयोजित प्रोग्राम में लगभग दो दर्जन कवियों ने अपनी रचनाओं से राष्ट्रकवि त्रिपाठी को श्रद्धांजलि अर्पित किया। देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. डीएम मिश्र ने की। कवि डीएम मिश्र ने त्रिपाठी जी की कई रचनाओं का पाठ किया और अपनी गजलें सुनाईं। उन्होंने सुनाया लुटेरे हम फकीरों से भला क्या ले के जायेंगे, कि दिल भी जोगिया है और मन भी सूफियाना है, न कुंडी है न ताला है न पहरा है न पाबंदी, यहां पर सब बराबर हैं ये उसका शामियाना है।
इनके अलावा डा. ओंकार नाथ द्विवेदी, रामप्यारे प्रजापति, सुशील कुमार पाण्डेय, आद्या प्रसाद सिंह ‘प्रदीप’, जगदीश श्रीवास्तव, देव नारायण शर्मा, दयाराम अटल, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, उत्कर्ष सिंह और उषा श्रीवास्तव आदि ने काव्य पाठ किया।

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