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विश्वप्रसिद्ध कथा वाचक प्रेम भूषण ने बताया रामचरित मानस का महत्व



शिवेश शुक्ला 
प्रतापगढ़। जनपद के लालगंज तहसील  क्षेत्र के उदियापुर गांव में आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन  अंर्तराष्ट्रीय कथा वाचक प्रेमभूषण जी महराज ने कहा कि राम कथा शशिकिरण समानाए सन्त चकोर करहिं जेहि पाना । उन्होंने  श्री राम चरित मानस के सात काण्डों के आरम्भ में सात श्लोकों से स्तुति कर आरम्भ करते हुए सर्व प्रथम गणेश और माँ सरस्वती की वंदना की क्योकि गणेश जी बुद्धि और माँ वाणी देती हैं और दोनों प्राप्त होने पर ही ब्यक्ति  जीवन मे समन्वित भाव से रह पाता है ।प्रशिद्ध श्रीरामकथाकार  ने कहा कि जीवन मे सुख शांति के बगैर सब ब्यर्थ है और चित्त में स्थिरता के बगैर जीवन मे स्थिरता नही आती हैद्य और वह आता है सहज विहार से क्योकि आतंक का पर्याय रावण रहता तो सोने की लंका में था पर सबसे अशांत था और जंगल में भी रहकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम में शांति थी । इसलिये धर्म जीवन पद्धति है और गोस्वामी जी ने लिखा है .धर्म न दूसर सत्य समानाए आगम निगम पुराण बखाना । परम धरम श्रुति विदित अहिंसाए पर निंदा सम अघ न गरीसा। परहित सरिस धरम नहिं भाईए पर पीड़ा सम नहिं अधमाई। जैसे तैसे नहीं जिया जा सकता ए जीवन मे जब तक सत्य का ब्रत न हो एपरमार्थ की प्रवित्ति न हो एकोई स्मरण नहीं करेगा । श्री राम कथा के आरम्भ पर स्वामी जी ने बताया कि चार स्थानों पर आरम्भ में श्री राम कथा  सुनाई गई सबसे पहले भगवान शंकर ने माता पार्वती को फिर याज्ञवल्क्य ने  प्रयाग में भरद्वाज जी को और कागभुसुंडि जी ने नीलगिरी पर्वत पर तथा गोस्वामी तुलसी दास जी ने अस्सी घाट पर माँ गंगा को कथा सुनाई । जिसके चित्त में  जो भाव हो वह उस रूप में राम कथा सुन ले ।स्वामी जी ने कहा कि राम चरित जो समझ गया उसका जीवन धन्य हो गया क्यों कि राम जैसा भाई एपुत्र और मित्र नही तथा श्रेष्ठ राजा कोई नहीं आज भी रामराज की परिकल्पना ही श्रेष्ठ शासन के लिए की जाती है ।सब नर करै परस्पर प्रीती की दिशा में मानस ही राम राज्य की परिकल्पना साकार करने की प्रेरणा प्रदान करता है । बिनु सत्संग विवेक न होईए राम कथा बिनु सुलभ न सोई । संसार सर्वोत्तम नहीं है संसार को बनाने वाले परमात्मा सर्वोत्तम हैं इसलिए उनके श्रीचरणों मे ध्यान लगाकर उनके सत्कर्मों का अनुसरण करना जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए ।  जगत को बनाने वाले परमात्मा का जो अनुशरण करता है उसका जीवन धन्य हो जाता है । कर्तब्य के प्रति चतुराई का भाव  नहीं निष्ठापूर्वक जीने वाले पर ही भगवान की कृपा अपने आप बरसती है । इस मौके पर  शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ए नगर पंचायत लालगंज अध्यक्ष के प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी एसांसद  प्रमोद तिवारी के प्रतिनिधि भगौती प्रसाद तिवारीएभाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ए आयोजक रामपाल द्विवेदी एराजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी एरामफेर पांडेय एविनय शुक्लए ज्ञान प्रकाश शुक्ल, अजय मिश्र विशाल मूर्ति मिश्र ए डॉ अरुण कुमार द्विवेदीए विश्व भरण शुक्लए संजय मिश्राए विवेक उपाध्यायएराकेश पाण्डेय बारघाट एशिवपाल आदि ने प्रेम भूषण जी का माल्यार्पण कर भब्य स्वागत किया ।

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