सुनील उपाध्याय
बस्ती । सवर्ण लिबरेशन फ्रण्ट द्वारा शनिवार को प्रेस क्लब में जातिगत आरक्षण के विरूद्ध बिगुल बजाकर उच्च शिक्षा में सामान्य और पिछड़ी जातियों को शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिलाने वाले आईएएस स्व. लक्ष्मीकान्त शुक्ल को उनके जन्म दिन पर याद किया गया।
एसएलएफ संयोजक दीनदयाल त्रिपाठी ने लक्ष्मीकान्त शुक्ल के योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हुये कहा कि वे आईएएस थे, बस्ती में भी मुख्य विकास अधिकारी के रूप में योगदान दिया। चाहते तो सुख सुविधा का जीवन जी सकते थे किन्तु जातिगत आरक्षण और शैक्षणिक समानता, शिक्षा के बाजारीकरण के सवाल पर उन्होने संघर्ष का रास्ता चुना और सर्वोच्च न्यायालय से न्याय दिलाया। कहा कि जातिराज पुस्तक लिखने पर बसपा की सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने उन्हें बर्खास्त कर दिया किन्तु, पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया इसके बावजूद वे डिगे नहीं और न्यायालय से अपना हक लिया। वे अन्याय के विरूद्ध लडाका प्रवृत्ति के थे। आज जब वे इस दुनिया में नही है हम सबकी जिम्मेदाारी है कि जातिगत आरक्षण और शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाय क्योंकि वोट बैंक की लालच में राजनीतिक दल आरक्षण के सवाल पर सच सुनने को भी तैयार नही हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने जातिगत आरक्षण समाप्त किये जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजा। दीपक दूबे, वृजभूषण मिश्र, नन्हें उपाध्याय, उमेश कुमार उर्फ मुन्ना पाण्डेय, जमुना पाण्डेय, सुशील कुमार पाण्डेय, रवि प्रकाश मिश्र, प्रभात मिश्र, विपिन त्रिपाठी चन्दन, विनय पाण्डेय, उमाशंकर उपाध्याय, आलोक शुक्ल, दिलीप चन्द्र पाण्डेय आदि ने केन्द्र सरकार से मांग किया कि वह आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था पर विचार करे। जब सभी जातियों में गरीब हैं तो जातिगत आरक्षण का कोई औचित्य नही है। इसका आधार आर्थिक बनाया जाय।
लक्ष्मीकान्त शुक्ल के जन्म दिन पर आयोजित कार्यक्रम में मन्टू उपाध्याय, विपिन शुक्ल, नन्दलाल उपाध्याय, प्रणवीर सिंह, अरूण कुमार शुक्ल, राहुल तिवारी, प्रवेश शुक्ल, विपिन सिंह आदि उपस्थित रहे।


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