शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़ । लालगंज अंचल के उदियापुर गाँव में चल रही श्री रामकथा सुप्रसिद्ध कथाकार प्रेम भूषण जी महराज ने कथा के बिभिन्न आध्यात्मिक मर्मों का मार्मिक चित्रण किया जिस पर मौजूद श्रोता. भक्त भाव.बिभोर हो उठे । उन्होंने कहा कि जब जब होई धरम की हानी ए बाढहिं असुर अधम अभिमानी ए तब तब प्रभु धरि मनुज सरीरा ए हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा । धर्म पथ को न मानने वाले असुर ए मैं ही सब कर रहा हूँ का भाव रखने वाले जो उस समय धरती का भार हो जाते हैं तो उस भार को उतारने के लिए भगवान पांच प्रकार से पूर्णावतार लेते हैं । भक्त प्रह्लाद को जब पीड़ा हुई तो भगवान ने अवतार लिया । इसलिये सज्जनता हमारी थाती है उसका परित्याग कभी नहीं करना चाहिए । सज्जनता ही जीवन की सहजता है ।इस अवसर पर कथा आयोजक राम पाल द्विवेदी, राजेन्द्र प्रसाद द्विवेदी, विनय शुक्ल,भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी, हौसिला ओझा डॉ शक्ति कुमार पांडेय, विनय मिश्र, विवेक उपाध्याय प्रकाश चन्द्र मिश्र, सुधीर मिश्र, विशाल मूर्ति मिश्र, डॉ अरुण कुमार द्विवेदी, अजय मिश्र, सुरेश कुमार सिंह, सूबेदार सिंह चौहान रामफेर पांडेय ओम नरायन तिवारी आदि सहित हजारो की संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे ।

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