सुनील उपाध्याय
बस्ती । भीष्म का चरित्र जटिल है। नियति के हाथों कठपुतली बने इस कर्मशील एवं सत्यव्रती तथा श्रेष्ठों के प्रति श्रद्धावनत एवं आश्रितों के प्रति ममता से आकण्ठ-पूरित भीष्म कठिन परिवेश में भी वचन पालन का संदेश देते हैं। महाभारत में सबसे विशिष्ट चरित्र भीष्म पितामह का है। अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने आजन्म ब्रह्मचारी रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की और साथ ही राजसिंहासन पर अपने अधिकार को भी तिलाजंलि दी। दुर्योंधन के विचारों, नीतियों और दुष्कर्मों के घोर विरुद्ध रहते हुए भी कौरवों के पक्ष की सेवा करने की विवशता को स्वीकार किया, राजदरबार में द्रौपदी के चीरहरण के समय क्रोध और लज्जा से दांत पीसकर रह गए। परन्तु खुलकर विरोध करने में विवश रहे महाभारत युद्ध में भी कौरव सेना का सेनापतित्व करना पड़ा। जबकि मन में पाण्डवों के पक्षधर थे। उनका हृदय पाण्डवों के साथ था, शरीर कौरवों की सेवा में। यह सद्विचार पं. देवस्य मिश्र ने ब्राम्हण महासभा के निकट आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यास पीठ से व्यक्त किया।
भीष्म चरित्र के विविध प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुये पं. देवस्य मिश्र ने कहा कि भीष्म का चरित्र कुछ सीमा तक बिडम्बनाओं और विरोधाभासों से भी भरा है। स्वयं को उत्पीड़न कर भी वह दूसरों विशेषकर आत्मीयजनों की पीड़ा दूर करने के लिए सारे नीति-नियमों का उलंघन कर जाते हैं। इसे क्या कहेंगे ? समय की आवश्यकता अथवा नियति की क्रीड़ा ?
भीष्म के चरित्र की यह विशेषता थी की जो प्रतिज्ञा कर लेते थे, उससे नहीं हटते थे. उनके जीवन में इस प्रकार के अनेक उदहारण है। जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ हुआ तो भीष्म कौरवो की ओर थे, कृष्ण पांडवो की ओर थे, युद्ध के पूर्व कृष्ण ने कहा ‘‘ मैं अर्जुन का रथ हाकूँगा पर लडूँगा नहीं, भीष्म ने प्रतिज्ञा की ‘‘ मैं कृष्ण को शस्त्र उठाने को विवश कर दूंगा। अर्जुन ने शिखण्डी को आगे कर पितामह पर बाणों की वर्षा की। जब भीष्म रथ से गिरे, उनके शरीर का रोम - रोम बिंध चूका था. पूरा शरीर बाणों पर ही उठा रह गया। भीष्म ने घायल अवस्था में ही सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने प्राण न त्यागने की प्रतिज्ञा की। भीष्म का जीवन चरित्र उज्जवल है।
आयोजक रघुवंश उपाध्याय ने विधि विधान से कथा व्यास का पूजन किया। बताया कि सोमवार को कथा स्थल पर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जायेगा। डा. दुर्गेश मणि, श्रीमती कमला, विष्णुमणि, संजय कुमार, के साथ ही अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।


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