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पत्रकार की हत्या पर शिवराज सरकार पर गरजे वरुण गांधी


खुर्शीद खान/पंकज गुप्ता
सुल्तानपुर (यूपी). तीन दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र में पहुंचे बीजेपी नेता एवं सांसद वरुण गांधी ने दौरे के दूसरे दिन एमपी में पत्रकार की हुई हत्या पर शिवराज सरकार पर गरजे। यहां कादीपुर में उन्होंंने कहा कि ''क्रिमनल डीफोर्मेशन का क़ानून ख़त्म'' होना चाहिये। 


शनिवार को अपने दौरे के दूसरे दिन वरुण गांधी ने ताबड़तोड़ दर्जनों जनसभाओं को सम्बोधित किया। 
इस क्रम में कादीपुर के विमला मार्केट के पास आयोजित जनसभा में लोगों को सम्बोधित करते कहा कि ''क्रिमनल डीफोर्मेशन का क़ानून ख़त्म'' होना चाहिये। 
उन्होंंने कहा कि एक पत्रकार की हत्या हुई, आपने देखा और पढ़ा होगा, लोकतंत्र कैसे गहरा होना चाहिये से हमें सोचना होगा। 
वरुण ने कहा कि एक तरफ पत्रकारों को कहते हैं, जो कुख्यात हैं, जो माफ़िया हैं, जो क्रिमिनल हैं, जो ज़मीनों पर कब्ज़ा कर रहे हैं, उनके खिलाफ लिखो, दूसरी तरफ उन पत्रकारों की सुरक्षा और उनके परिवार का ध्यान नहीं रखते। 
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्यों कोई पत्रकार अपने आपको दांव पे लगा के ये काम करेगा? जब उनको लगेगा इस काम के करने पर तो *''नहले के दहले पड़ जायेगें''।*
वरुण गांधी ने कहा की मैं हमेशा कहता हूं चार स्तम्भ हैं, अध्यापक, वकील, डाक्टर और पत्रकार। ये चारों ने हमारे देश की स्वतंत्रता में और स्वतंत्रता के बाद एक अपार सहयोग किया है। 


हिंदू-मुसलमान की राजनीति से थक गये हैं लोग

ग़ौरतलब हो कि दोस्तपुर ब्लाक के बाज़ार में मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। 
अपने सम्बोधन में सांसद वरुण गांधी ने बीजेपी और इस सरीखे सभी दलों को निशाने में रखा। 
उन्होंंने कहा कि बहुत दिनों से इस देश में 
हिंदू-मुसलमान की राजनीति हुई, जात-पात की राजनीति हुई, क्षेत्रवाद की राजनीति हुई, लेकिन अब लोग इससे थक चुके हैं, ख़ासकर के जो नौजवान हैं। 
वरुण गांधी ने नसीहत भरे शब्दों में कहा कि हमारे धर्म और आस्थाए अलग हैं, लेकिन घर-बच्चों के लिये सोच एक है। 
बिल्कुल उसी तरह जब क्रिकेट के मैच में टीम इंडिया जीतती है तो हम सब खुश होते है। 
वरुण गांधी यहीं नही रुके उन्होंने कहा कि आप परमात्मा को किसी शब्द से बुलाइए।
उन्होंंने एक मनोवैज्ञानिक की तरह समझाते हुए कहा कि सबसे बड़ी ताक़त प्यार की है, उससे बड़ी कोई ताक़त नहीं। 
वरुण गांधी ने कहा हम सब अपने गुस्से को थूकें, एक-दूसरे से हमको जो चीज़ें अलग करती हैं वो थूकें और देश को और मज़बूत करें। 
देश किसी लकीर का नाम नहीं, देश हमारे अंदर है, हम सब इसे एक साथ आगे बढ़ाये। 
अपने राजनैतिक कैरियर के बारे में विचार रखते हुए उन्होंंने कहा 'मैं राजनीति नाम-पैसे कमाने के लिये नहीं करता हूं, लोगों का बोझ हल्का करने के लिये करता हूं। 
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