नारियल:जैसा की आप सभी जानते हें की नारियल एक ऐसी वस्तु है जो कि किसी भी सात्त्विक अनुष्ठान, सात्त्विक
पूजा,धार्मिक कृत्यों तथा हरेक मांगलिक कार्यों के लिये सबसे अधिक महत्वपूर्ण सामग्री है। इसकी कुछ विभिन्न
विधियों द्वारा हम अपने पारिवारिक, दाम्पत्य तथा आर्थिक परेशानियों से निजात पा सकते हैं।
:घर में किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या हो तो एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वास्तिक का चिन्ह बनायें कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़ चना) के साथ हनुमान जी के मन्दिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें तत्काल लाभ प्राप्त होगा।
:यदि कुण्ड़ली में शनि, राहू, केतु की अशुभ दृष्टि, इसकी अशुभ दशा , शनि की ढ़ैया या साढ़े साती चल रही तो एक सूखे मेवे वाला नारियल लेकर उस पर मुँह के आकार का एक कट करें. उसमें पाँच रुपये का मेवा और पाँच रुपये की चीनी का बुरादा भर कर ढ़क्कन को बन्द कर दें पास ही किसी किसी पीपल के पेड़ के नीचे एक हाथ या सवा हाथ गढ्ढ़ा खोदकर उसमें नारियल को स्थापित कर दें उसे मिट्टी से अच्छे से दबाकर घर चले जायें ध्यान रखें कि पीछे मुड़कर नही देखना सभी प्रकार के मानसिक तनाव से छुटकारा मिल जायेगा।
:यदि आपके व्यापार में लगातार हानि हो रही हो, घाटा रुकने का नाम नही ले रहा हो तो - गुरुवार के दिन एक नारियल सवा मीटर पीले वस्त्र में लपेटे एक जोड़ा जनेऊ, सवा पाव मिष्ठान के साथ आस- पास के किसी भी विष्णु मन्दिर में अपने संकल्प के साथ चढ़ा दें तत्काल ही लाभ प्राप्त होगा व्यापार चल निकलेगा।
:यदि धन का संचय न हो पा रहा हो, परिवार आर्थिक दशा को लेकर चिन्तित हो तो-शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के मन्दिर में एक जटावाला नारियल, गुलाब, कमल पुष्प माला, सवा मीटर गुलाबी, सफ़ेद कपड़ा, सवा पाव चमेली, दही, सफ़ेद मिष्ठान एक जोड़ा जनेऊ के साथ माता को अर्पित करें माँ की कपूर व देसी घी से आरती उतारें तथा श्रीकनकधारास्तोत्र का जाप करें धन सम्बन्धी समस्या तत्काल समाप्त हो जायेगी
:शनि, राहू या केतु जनित कोई समस्या हो, कोई ऊपरी बाधा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, कोई
अनजाना भय आपको भयभीत कर रहा हो अथवा ऐसा लग हो कि किसी ने आपके परिवार पर कुछ कर दिया है तो इसके निवारण के लिये-शनिवार के दिन एक जलदार जटावाला नारियल लेकर उसे काले कपड़े में लपेटें100 ग्राम काले तिल,100 ग्राम उड़द की दाल तथा एक कील के साथ उसे बहते जल में प्रवाहित करें ऐसा करना बहुत ही लाभकारी होता है।
:किसी भी प्रकार की बाधा, नजर दोष, किसी भी प्रकार का भयंकर ज्वर, गम्भीर से गम्भीर रोगों की समस्या विशेषकर रक्त सम्बन्धी हो तो- शनिवार के दिन एक नारियल, लाल कपड़े में लपेटकर उसे अपने ऊपर सात बार उवारें. किसी भी हनुमान मन्दिर में ले जाकर उसे हनुमान जी के चरणों में अर्पित कर दें इस प्रयोग से तत्काल लाभ होगा।
:यदि राहू की कोई समस्या हो, तनाव बहुत अधिक रहता हो, क्रोध बहुत अधिक आ रहा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, परेशानियों के कारण नींद न आ रही हो तो- बुधवार की रात्रि को एक नारियल को अपने पास
रखकर सोयें अगले दिन अर्थात् वीरवार की सुबह वह नारियल कुछ दक्षिणा के साथ गणेश जी के चरणों में अर्पित कर दें मन्दिर में यथासम्भव 11 या 21 लगाकर दान कर कर दें हर प्रकार का अमंगल, मंगल में बदल जायेगा।
:यदि आप किसी गम्भीर आपत्ति में घिर गये हैं. आपको आगे बढ़ने का कोई रास्ता नही दिख रहा हो तो - दो नारियल, एक चुनरी, कपूर, गूलर के पुष्प की माला से देवी दुर्गा का दुर्गा मंदिर में पूजन करें. एक नारियल चुनरी में लपेट कर (यथासम्भव दक्षिणा के साथ)माता के चरणों में अर्पित कर दें. माता की कपूर से आरती करें‘हुं फ़ट्’ बोलकर दूसरा नारियल फ़ोड़कर माता को बलि दें सभी प्रकार के अनजाने भय तथा शत्रु बाधा से तत्काल लाभ होगा।
ऊपरी हवाओं से मुकित हेतु हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री का जप तथा हवन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अगिन तथा लाल मिर्जी चलानी चाहिये।
रोज सूर्यास्त के समय एक साफ-सुथरे बर्तन में गाय का आधा किलो दूध लेकर उसमें शुद्ध शहद की नौ बूँदें
मिला लें। फिर स्नन करके, शुद्व वस्त्र पहनकर मकान की छत से नीचे तक प्रत्येक कमरे, जीने, गैलरी आदि में
उस दूध के छींटे देते हुए द्वार तक आयें और बचे हुए दूध को मुख्य द्वार के बाहर गिरा दें। क्रिया के दौरान इष्टदेव का स्मरण करते रहें। यह क्रिया इक्कीस दिन तक नियमित रूप से करें, घर पर प्रभावी ऊपरी हवाएँ दूर हो जायेंगी।
रविवार को बांह पर काले धतूरे की जड़ बांधे, ऊपरी हवाओं से मुकित मिलेगी। लहसुन के रस में हींग घोलकर आँख में डालने या सूँधने से पीडि़त व्यकित को ऊपरी हवाओं से मुकित मिल जाती है। ऊपरी बाधाओं से मुकित हेतु निम्नोक्त मंत्र का यथासम्भव जपकरना चाहिये।
ष ओम नमो भगवते रूद्राय नम: कोशेश्रस्य नमो
ज्योति पंतगाय नमो रूद्राय नम: सिद्धि स्वाहा।।
घर के मुख्य द्वार के समीप स्वेतार्क का पौधा लगायें, घर ऊपरी हवाओं से मुक्त रहेगा। उपले या लकड़ी के कोयले जलाकर उसमें धूनी की विशिष्ट वस्तुएँ डालें और उसमें उत्पन्न होने वाला धुआँ पीडि़त व्यकित को सुंघाएँ। यह क्रिया किसी ऐसे व्यकित से करवायें जो अनुभवी हो और जिसमें पर्याप्त आत्मबल हो। प्रात: काल बीच मंत्र इक्लीश का उच्चारण करते हुए काली मिर्ज के नौ दाने सिर पर से घुमाकर दक्षिण दिशा की ओर फेंक दें ऊपरी बला दूर हो जायेगी। रविवार को स्नानादि से निवृत्त होकर काले कपड़े की छोटी थैली में तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च और सहदेर्इ की जड़ बाँधकर गले में धारण करें, नजर दोष जप करके सरसों का तेल अभिमंत्रित कर लें और उसमें पीडि़त व्यकित के शरीर पर मालिश करें, व्यकित पीड़ामुक्त हो जायेगा।
मंत्र : ओम नमो काली कपाला देहि-देहि स्वाहा।
ऊपरी हवाओं के शकितशाली होने की सिथति में शाबर मंत्रों का जप एवं प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग करने के पूर्व इन मंत्रों का दीपावली की रात को अथवा होलिका दहन की रात को जलती हुर्इ होली के सामने या फिर शमशान में 108 बार जप कर इन्हें सिद्ध कर लेना चाहिए। यहां यह उल्लेख कर देना आवश्यक है कि इन्हें सिद्ध करने के इच्छुक साधकों में पर्याप्त आत्मबल होना चाहिए, अन्यथा हानि हो सकती है।
आचार्य पवन तिवारी
9621203721


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